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Maharajganj News: नेपाल के रास्ते भारत पहुंच रहा लाइटर सहित अन्य सामान

Tue, 19 Mar 2024 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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बॉर्डर एरिया में बरामद चाइनीज लाइटर के साथ एसएसबी जवान।
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महराजगंज। चीन में बने सामानों की तस्करी नेपाल सीमा के रास्ते भारत में धड़ल्ले से हो रही है। लाइटर रिमोट के अलावा अन्य सामान भारत पहुंच रहे हैं। इसके पहले चाइनीज मटर, सेब के बाद अब चीन में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भारत आ रहे हैं।
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सूत्र बताते हैं कि तस्करी के धंधे में सीमा के दोनों ओर के तस्कर सक्रिय हैं। मौसम में उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान नेपाल के रास्ते भारतीय बाजारों में तस्करी हो रही है। इससे राजस्व की तो क्षति हो ही रही है। इसके अलावा भारत में बने सामानों की बिक्री पर भी इसका असर पड़ रहा है। चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग इसलिए भी अधिक होती है कि वह सस्ता और कम इलेक्ट्रिक खपत वाला होता है। जनपद के नेपाली सीमावर्ती झेत्र महेशपुर, नवलपुर, भैरहवा, मर्चवार के रास्ते तस्कर चाइना का इलेक्ट्रॉनिक सामान भारतीय क्षेत्रों में पहुंचा रहे हैं। हाल के दिनों में लगातार कस्टम व एसएसबी के जवानों ने भारी मात्रा में लाइटर पकड़ा था। इसके बावजूद खुले बॉर्डर के माध्यम से तस्कर रोजाना भारी संख्या में ऐसे सामान की तस्करी कर भारतीय बाजारों में भेज रहे हैं।
सूत्रों की माने तो नेपाल के कई ऐसे इलाके हैं जो सीमा से सटे चाइना से आने वाले सामानों को नेपाल के गोदाम में डंप करते है। फिर खुली सीमा का लाभ लेकर सीमावर्ती भारतीय गांव में रख देते हैं। उसके बाद भारत के महानगरों तक भेज दिया जाता है।
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अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में चौकसी बरती जा रही है। समय-समय पर बरामदगी की जाती है।


टॉर्च, घड़ी और लाइटर की अधिक मांग
ठंड के समय में उपयोग किए जाने वाले रूम हीटर, पानी गर्म करने के जग की मांग अधिक है। बताया जाता है कि चाइना से आने वाले इस तरह के समान में बिजली की खपत कम होती है। काफी कम दाम में लोगों को उपलब्ध भी हो जाता है। यही वजह है कि लोग इसे अधिक पसंद कर रहे हैं। पुलिस कर्मी ने बताया कि गुप्तचर की मदद से लगातार ऐसे चाइना निर्मित सामानों की को जब्त किया जाता है।

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सीमा के मुख्य मार्गों पर जवानों की कड़ी चौकसी
तस्करों ने पगडंडियों का रास्ता चुना है। मार्ग से पैदल या साइकिल से निकल जाते हैं। इस काम को सीमा के दोनों ओर के तस्कर अंजाम देते हैं। चाइनीज समान सस्ता होने के चलते छोटे-बड़े व्यापारी तस्करों को पनाह दे देते हैं। सूत्र बताते हैं कि चाइनीज समान चाइना से नेपाल होते हुए सीधे भारतीय बाजारों में पहुंचायी जा रही है। बॉर्डर सुबह 6 बजे खुलता है और रात 10 बजे बंद हो जाता है। इसके बाद तस्करों के नेटवर्क शुरू हो जाते हैं। रात 11 बजे से सुबह चार बजे तक तस्कर अंधेरे का लाभ लेते हुए चोर रास्तों से सामान भारतीय सीमा में डंप कर लेते हैं।


तस्करी के लिए ही किया जाता है इंपोर्ट
नेपाल में भारत के मुकाबले कस्टम ड्यूटी शुल्क काफी कम है। वेल्युएशन को मान्यता मिलने के कारण भारतीय इम्पोर्टर नेपाल में जाकर चाइना से चाइनीज सामानों का आयात करते हैं। फिर उसे भारत में तस्करी के जरिए लाकर आसानी से खपाया जाता है। चीन से आयात के लिए पहले कंटेनर को भारत के कोलकाता या हल्दिया पोर्ट पर मंगाया जाता है। फिर कस्टम ट्रांस डिक्लेरेशन मिलने के बाद वह सामान बिहार रकसौल के रास्ते बिरगज भंसार या सोनौली बॉर्डर होते हुए भैरहवा भंसार पहुंचता है। शुल्क जमा करने के बाद गाड़ी को नेपाली ट्रक से सीमावर्ती गांव में डंप करा दिया जाता है, फिर भारत में भेजने की तैयारी शुरू हो जाती है।
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केस नंबर एक
17 मार्च को सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने बॉर्डर के पिलर संख्या 505/10 के पास मुख्य मार्ग का घेराबंदी कर एक बाइक चार चाइनीज रेडियो रिमोट बरामद की थी। जबकि मौके से आरोपी भागने में सफल रहे।

केस नंबर दो
16 मार्च 2024 को सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने बरगदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत भारत नेपाल बॉर्डर के पिलर संख्या 509/1 से सटे चकरार गांव के पास से तस्करी की 2600 चाइनीज लाइटर बरामद की थी। इसके साथ टीम ने तीन साइकिल भी पकड़ी थी। जबकि मौके से आरोपी भागने में सफल रहे।
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