जिले में ई-रिक्शा पर सवारी जान जोखिम में डालने जैसा है। किशोर के हाथ में ई रिक्शा का हैंडल है। उन्हें कोई रोकना टोकता भी नहीं है। जिले में 3200 ई रिक्शा पंजीकृत हैं। महज दो हजार के पास ही ड्राइविंग लाइसेंस है। जिनके पास दोपहिया वाहन के लाइसेंस हैं, वे भी ई-रिक्शा चलाने लगे हैं। अक्सर ई-रिक्शा के पलटने की घटनाएं आए दिन होती हैं।
जिले में चल रहे ज्यादातर ई-रिक्शा अनाड़ी हाथों में हैं। किशोर भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, तीन हजार दो सौ ई-रिक्शा पंजीकृत हैं और महज दो हजार के पास ही ड्राइविंग लाइसेंस है। जिनके पास दोपहिया वाहन के लाइसेंस हैं, वे भी ई-रिक्शा चलाने लगे हैं। शहर में ई-रिक्शा के पलटने की घटनाएं आए दिन होती हैं। एक व्यक्ति की जान जा चुकी है और बहुत सारे लोग चोटिल हो चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल रही है।
बुधवार को टीम ने शहर के अलावा जिले में चल रहे ई-रिक्शा चालकों के बारे में जानकारी हासिल की तो चौंकाने वाले पहलू सामने आए। सुबह 11 बजे से शहर में जिला अस्पताल के पास ई-रिक्शा चालक रविंद्र मिला। वह चार सवारी बैठाकर जा रहा था। जैसे ही वह आगे बढ़ा एक वृद्ध महिला ने रूकने का इशारा किया तो उसे भी बैठा लिया। चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। बताया कि बाइक चलाने का ड्राइविंग लाइसेंस है। किसी तरह से गुजर बसर कर रहा हूं। कभी किसी ने कुछ पूछा नहीं आप क्यों पूछ रहे हैं?
दोपहर 12 बजे हनुमानगढ़ी चौराहे पर ई-रिक्शा खड़ा कर चालक राधेश्याम सवारी भर रहा था। उसने बताया कि कर्ज लेकर किसी तरह से ई रिक्शा खरीदा हूं। आमदनी से किस्त जमा कर रहा हूं। उसने बताया कि लाइसेंस के लिए आवेदन किया हूं, अभी मिला है। यह पूछने पर वह सवाल करने लगा की यह सब जानकारी लेकर क्या करेंगे। वह कुछ और पूछे इसके पहले ही टीम को वहां से चले जाना पड़ा।
दोपहर दो बजे निचलौल मार्ग पर कई ई-रिक्शा खड़ा दिखा, जो सवारी का इंतजार कर रहे थे। इस बीच एक ई-रिक्शा चालक सिंदुरिया की ओर से आकर रूका, चालक ने कहा कि बहुत समस्या हो रही है। सवारी कम मिल रहे हैं। वह आगे बढ़ा तो दो महिलाएं उसमें बैठी। चालक किशोर था और उसके पास डीएल भी नहीं था। इसी प्रकार कई ई-रिक्शा चालक कम उम्र के दिखे, उनको रोकने टोकने वाला कोई नहीं है।