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Maharajganj News: सोहगीबरवां में सुरक्षित नहीं हैं तेंदुए

Tue, 25 Jun 2024 05:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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तेंदुए के शव के पास लगी बच्चो की भीड़।
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महराजगंज। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में तेंदुए भी अब महफूज नहीं है। अगर 11 सालों के रिकार्ड पर गौर करें तो नौ तेंदुओं की मौत हो चुकी है। वैसे तो मौत का कारण जानने के लिए वन विभाग मृत तेदुओं का पोस्टमार्टम तो कराता है, लेकिन कहीं सामान्य मौत तो हमले से मौत का कारण होता है। कुछ की बीमारी से भी मौत होने की बात कही जाती है।
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सोहगीबरवा को पूर्वांचल का जिम कार्बेट कहा जाता है। सोहगीबरवां में गणना के मुताबिक तेदुओं की संख्या 67 बताई जाती है। इसमें 16 नर, 19 मादा तो 22 शावक बताए जाते हैं। बीते कुछ साल से तेदुओं की हो रही मौत से वन्य जीव प्रेमियों के मन में तरह-तरह की भावना उपज रही है। कुछ लोग शिकार तो कुछ सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के विभिन्न नालो मेंं बहने वाला दूषित जल का कारण बताते हैं। शंकाओं के बीच वन विभाग इनके मौत पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाता है। जबकि तेंदुओं की मौत संदेहास्पद ही होती है।

2015 में हुई थी चार तेंदुओं की मौत
सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में अगर मृत पाए गए तेंदुओं की संख्या पर नजर डाले तो 10 साल में आठ तेदुओं की मौत हो चुकी है। इसमें चार की मौत 2015 में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब आठ साल पहले डोमा जंगल में एक तेदुएं की मौत, मधवलियां गोसदन में संदिग्ध हालात में मौत, 24 अप्रैल 2015 में पकड़ी जंगल में तेंदुए की संदेहास्पद मौत, 10 जून 2015 को लक्ष्मीपुर रेंज में मौत, 29 नवंबर 2015 को मधवलिया रेंज के दुधई बीट में तेंदुए की मौत, नौ दिसंबर 2015 को चौक रेंज के नक्शा बक्शा गांव में तेंदुए की मौत, 22 मार्च 2018 को चौक रेंज के नाथनगर बीट में तेंदुए की मौत तथा 22 दिसंबर 2018 को उत्तरी चौक रेंज में तेंदुए की मौत हो गई।
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तो क्या घाव लगने से पीड़िता था तेंदुआ

गंभीर रूप से घायल तेंदुआ दशरथपुर गांव के पास टेढ़ी घाट बीट के जंगल में लगभग एक सप्ताह से दिख रहा था। वह रात में गरजता था। ग्रामीणों की मानें तो तेंदुए के कमर में चोट लगी थी। घाव अधिक होने से उसमें कीड़े पड़ गए थे। जिससे वह कमजोर हो गया था। इसके चलते वह शिकार भी नहीं कर पाता था। तेंदुआ की मौत होने की खबर पर चर्चा आम हो रही है। हर तरफ उसके मौत की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि तेंदुए का समय से इलाज हुआ होता तो मौत नहीं होती।


तेंदुआ कैसे घायल हुआ

सोमवार को टेढ़ी घाट वन चौकी के पास मृत मिला तेंदुआ कैसे घायल हुआ यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह कयास लगाया जा रहा है कि जंगल में शिकार के दौरान तेंदुआ और सूअर के बीच लड़ाई हुई होगी अथवा दो तेंदुआ के आपसी लड़ाई में घायल हुआ होगा।

वन के अंदर ही जरूरतों को पूरा करने पर जोर

वन क्षेत्र के अंदर पोखरियों में पानी भरने की व्यवस्था की गई है। इससे वन्य जीवों को राहत मिलेगी तो बाहर नहीं आएंगे। उनके लिए वन के अंदर ही जरूरतों को पूरा करने पर जोर है। वन के अंदर वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। उनके सर्वधन पर जोर है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओं की संख्या 67 हैं। चीतल 2004, सांभर 469, नीलगाय 2494, जंगली सुअर 3803, बंदर 7586 , लंगूर 4916 , सियार 1285, जंगली बिल्ली 113, मगरमच्छ 166, काकड़ 416, खरगोश 573, वनगाय 680 की संख्या में मौजूद हैं।
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