सिसवा बाजार। आईटी सेक्टर में पंद्रह लाख सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर नवरतन तिवारी तीन साल से छह एकड़ भूमि पर आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। वह देसी बीज, गाय के गोबर और मूत्र का उपयोग कर बेहतर फसल उपजा कर 60 हजार रुपये महीने की आय कर रहे हैं। वे अपने खेत में 52 तरह के अनाज, फल, सब्जी, मशरूम, दलहन, औषधिय पौधे उगा रहे हैं। वह हल्दी और अदरक का पाउडर विदेश भेजकर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।
सिसवा ब्लॉक के ग्राम शीतलापुर निवासी नवरतन तिवारी अपने खेत में कोई कीटनाशक या यूरिया, डीएपी अथवा किसी अन्य फर्टीलाइजर का प्रयोग नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले वह नोएडा में आईटी सेक्टर में पंद्रह लाख सालाना पैकेज पर नौकरी करते थे। वहां से वह कई बार हरियाणा में मित्रों के घर गए, जहां आर्गेनिक खेती देख उनके मन में भी कृषि के क्षेत्र में भाग्य आजमाने का जज्बा पैदा हुआ। उसी दौरान महाराष्ट्र के सुभाष पालेकर कृषि अनुसंधान केंद्र जाना हुआ, जहां खेती की बारीकियां सीखने का मौका मिला। लाकडाउन में छह एकड़ भूमि और तीन गायों से आर्गेनिक खेती की शुरुआत की। नवरतन ने बताया कि आज उनके खेत में मानसी गेंहू, गोभी, मटर, चना, धनिया, भींडी, आलू बैगन, टमाटर, बिंस, अनार, अन्नास, स्ट्राबेरी, मौसमी, सेव सहित 52 किस्म के अनाज, फल और सब्जियां पैदा होती हैं।
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गाय के गोबर और मूत्र से जीवामृत बना करते हैं फसल पर छिड़काव
नवरतन तिवारी ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए गोमूत्र को दो सौ लीटर के ड्रम में इकट्ठा कर उसमें 13 किलो गोबर, एक किलो गुड़, बेसन या किसी भी दाल का आटा आधा किलो डाल कर रखा जाता है। तीन से चार दिन बाद उसका फसल पर छिड़काव किया जाता है। घन जीवामृत बनाने के लिए गोबर-मूत्र इकट्ठा कर 55 दिन की प्रक्रिया के बाद तैयार किया जाता है। उसे जोताई के समय डाला जाता है।
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खर-पतवार को भी सड़ा कर खेती में ही करते हैं उपयोग
नवरतन तिवारी ने बताया कि खेत में उपजे खर-पतवार को सड़ा कर उसका खेत में ही प्रयोग करते हैं। पूजा-पाठ में प्रयोग के लिए गाय के गोबर से बने उपले और गोमूत्र अमेजन पर भी बेचते हैं। साथ गाय का घी, दूध नगर के लोगों को बेचते हैं। साथ ही देसी पॉली हाउस बना कर मशरूम और बेमौसमी हरी सब्जियों की पैदावार करते हैं।
एक एकड़ में सात से आठ लाख रुपये की आमदनी
नवरतन ने बताया कि सुभाष पालेकर पद्धति से खेती कर एक एकड़ में कम से कम सात से आठ लाख रुपये की आय की जा सकती है। उन्होंने देसी बीज, जैविक खाद व कृषि संबंधी सलाह के लिए भी किसानों को आमंत्रित किया है, जिससे क्षेत्र में आर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिल सके और लोग बाजार मूल्य पर शुद्ध और ताजी सब्जी-फल और अनाज खा कर खुद को निरोग रख सकें।