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Maharajganj News: लखनऊ चिड़ियाघर की शोभा बढ़ा रहा लक्ष्मीपुर का ट्राॅम वे रेल इंजन और शैलून

Thu, 01 Feb 2024 03:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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लक्ष्मीपुर। लक्ष्मीपुर एकमा डिपो में बंद पड़ी भारत की पहली ट्राॅम वे रेल परियोजना का एक इंजन, बोगी, शैलून प्रदेश की राजधानी लखनऊ चिड़ियाघर की शोभा बढ़ा रही है। शेष इंजन, बोगी, शैलून, ट्राॅली एकमा डिपो में ही उपेक्षित है। जबकि लक्ष्मीपुर में ही इसे संग्रहित कर म्यूजियम बनाने की योजना थी।
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छह वर्ष पहले ट्राॅम वे रेल परियोजना के भौतिक निरीक्षण करने दिल्ली से पर्यटन व रेल विभाग की चार सदस्यीय टीम सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर रेंज में पहुंची थी। निरीक्षण के बाद उन्होंने कार्ययोजना बनाया था कि एकमा डिपो में 1982 से बंद पड़ी भारत की ट्राॅम वे रेल परियोजना के इंजन, बोगी, सैलून को सैलानियों के लिए जंगल में 15 किमी तक चलाई जाएगी, लेकिन यह कार्ययोजना चार साल से फाइलों में बंद पड़ी है।

लक्ष्मीपुर रेंज में स्थित ट्राॅम वे रेल को जीवित करने की नियत से 17 सितंबर 2017 को भौतिक निरीक्षण करने दिल्ली से पर्यटन व रेल विभाग की टीम जंगल में पहुंची थी। इसमें रेलवे के रिटायर्ड अधिकारी वीबी सूद के साथ तत्कालीन डीएफओ मनीष सिंह भी मौजूद थे। सबसे पहले वे एकमा डिपो में संरक्षित भारत की पहली ट्राॅम वे रेल परियोजना के अवशेषों का निरीक्षण किया। उसके बाद जंगल में बिछी रेल लाइन का जायजा लिया। जीर्णशीर्ण पुलों का निरीक्षण करने के बाद रेंज कार्यालय पहुंचे।
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सूद ने बताया था कि भारत सरकार के दिशा निर्देश पर देश की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना के इंजन को चलाने की योजना बनाई जा रही है। जिसको जंगल में करीब 15 किमी तक दौड़ाया जाएगा। इसके लिए रेलवे ट्रैक, स्लीपर व आठ पुलिया के मरम्मत की कार्ययोजना बना ली गई है। पुलों के निर्माण में लकड़ी के पिलर लगे थे लेकिन अब सीमेंटेड आरसीसी पीलर लगाने का प्रस्ताव बना है। जिसे लकड़ी का रंग दिए जाने की मंशा योजना में शामिल किया गया था। समय बीतने के बाद आला अफसर भी बदल गए और कार्ययोजना फाइलों में दब कर रह गई।
लक्ष्मीपुर रेंजर के के गुप्ता ने बताया कि ट्राॅम वे रेल के इंजन आदि को तत्कालीन अधिकारियों की निगरानी में संरक्षित कर दिया गया है। जंगल में 15 किमी तक ट्रॉम वे रेल इंजन दौड़ाने की योजना तत्कालीन विभागीय अधिकारियों द्वारा बनाई गई थी। इस पर शासन के आदेश का इंतजार है।
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