महराजगंज। रैन बसेरों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ठंड में जरूरतमंद भटकने को विवश हैं। उनको बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नगर पंचायतों में रैन बसेरे तो बना दिए गए हैं, लेकिन वहां बेहतर सुविधाएं नहीं हैं। कहीं शौचालय खराब हैं, तो कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं है। व्यवस्था बदहाल होने के कारण जरूरतमंद यहां रूकना नहीं चाहते हैं। शुक्रवार को पड़ताल में रैन बसेरों की खामियों सामने आईं।
परतावल में नगर पंचायत की ओर से सीएचसी परिसर में रैन बसेरा बना है। यहां तख्त पर बिस्तर रख दिया गया है। इसके अलावा यहां और कोई सुविधा नहीं है। यहां तक की बिजली कनेक्शन भी नहीं है। यही वजह है कि आज तक यहां किसी ने शरण नहीं ली। बेसहारा लोग ठंड में भी सडकों पर सोने को मजबूर हैं। इसके साथ ही रैन बसेरा के बगल में सार्वजनिक शौचालय की हालत ठीक नहीं है। इसका प्रयोग करना तो दूर यहां खड़ा होना भी दुश्वार है। शौचालय में अंदर से लेकर बाहर तक गंदगी का अंबार है। दुर्गंध से सांस लेना दुश्वार हो गया है। अलाव की भी व्यवस्था नहीं है। कस्बे के रमेश ने बताया कि दिन ढलते ही यहां अंधेरा छा जाता है। दूर दराज से आने वाले लोगों को पता भी नहीं चलता की रैन बसेरा कहा है।
यही हाल नगर पंचायत पनियरा का भी है। बसडिला में वित्तीय वर्ष 2013-14 सांसद निधि योजना से बनाए गए यात्री विश्रामालय को रैन बसेरा बनाया गया है। इसमें छह तख्त पर बिस्तर लगाया गया है। यहां अब तक रुकने वालों की संख्या 13 है। इसके सामने हैंडपंप का फर्श तक नहीं बना है, जिससे काई जमी हुई है। ठहरने वाले लोगों को इसी हैंडपंप का प्रयोग करना पड़ता है। बगल में स्थित शौचालय भी बदहाल है। दीवारों पर कई जमी है। नालियां टूटने लगी हैं। इन असुविधाओं के बीच लोगों को ठहरना पड़ता है।
अपर जिलाधिकारी डॉ. पंकज कुमार वर्मा कहना है कि अगर कहीं खामियां हैं तो उसे ठीक कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया जाएगा।