14 फरवरी को रोजगार सेवक ने डीएम से की थी शिकायत, दुकान बचाने के लिए दुकानदार ने 28 फरवरी को न्यायालय में विवाह विच्छेद के लिए की थी अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
निचलौल। क्षेत्र के एक गांव से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। क्योंकि, यहां पर सरकारी सस्ते गल्ले (कोटे) की दुकान को बचाने के लिए पत्नी को पति से तलाक लेने के लिए न्यायालय में आवेदन करना पड़ा। उसके बाद भी कोटे की दुकान नहीं बच सकी। यह खुलासा विभाग के कर्मचारियों की जांच के बाद हुई कार्रवाई से हुआ है।
जिला पूर्ति अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि 14 फरवरी को रामकृपाल निवासी बरगदही ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर बताया था कि ग्राम सभा के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान शैलेश पटेल की पत्नी रंजीता पटेल के नाम से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान है, जो शासनादेश के खिलाफ है। ऐसे में जांच कर दुकान को निरस्त किया जाए। जिस मामले में 20 फरवरी को कोटे की दुकानदार रंजीता पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा गया था। उसके बाद तीन मार्च को कोटे की दुकानदार रंजीता ने नोटिस का जवाब देते हुए बताया था कि वह 2016 से कोटे की दुकान चला रही हैं। ग्रामीणों से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है। शादी के कुछ दिन बाद पति से विवाद हो गया था। उसके बाद दोनों को एक साथ रहना मुश्किल हो गया। जिसे लेकर 28 फरवरी को पत्नी रंजीता दुकानदार और पति शैलेश पटेल ग्राम प्रधान की ओर से विवाह विच्छेदन के लिए न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। अभी लंबित है। ऐसे में नोटिस के जवाब की जांच के बाद रंजीता पटेल निवासनी बरगदही के सरकारी सस्ते गल्ले (कोटे) की दुकान को निरस्त कर दिया गया है।
क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी की जांच में खुली पोल
जिला पूर्ति अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि कोटे की दुकानदार से नोटिस के मिले जवाब की जांच क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा कराई गई। इसमें पता चला कि दुकानदार रंजीता पटेल के पति शैलेश पटेल गांव के ग्राम प्रधान हैं। जबकि परिवार रजिस्टर की सत्यापित छाया प्रति में दोनों एक साथ हैं। ऐसे में दुकानदार रंजीता ने अपने पति शैलेश पटेल के नवनिर्वाचित होने की विभाग से जानकारी छिपाकर कोटे की दुकान बचाने के लिए जानबूझकर अपने पति से अलग होने के लिए न्यायालय में तलाकनामा दाखिल किया था।