रमजान के दूसरे जुमे पर देश की तरक्की व समाज में शांति के लिए दुआ की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। इस्लाम में जुमा के दिन की नमाज अन्य दिनों की अपेक्षा महत्वपूर्ण होती है। जिले में शुक्रवार को रमजान के दूसरे जुमे की नमाज अदा की गई। सभी मस्जिदों में अल्लाह की इबादत में रोजेदारों के सिर झुके। सुरक्षा को ध्यान में रखने में जिले में सभी प्रमुख स्थानों पर पुलिस तैनात रही। देश की तरक्की व समाज में शांति के लिए दुआ की गई।
नौतनवां, परतावल, घुघुली, निचलौल, पनियरा, फरेंदा, नौतनवा, मिठौरा, सिंदुरिया क्षेत्र की मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। मुस्लिम समाज के लोगों ने नमाज पढ़कर अपने गुनाहों से माफी मांगी। मस्जिदों में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए भीड़ लगी रही।
महराजगंज नूरी मस्जिद में इमाम कारी मोहम्मद इरशाद ने रमजान महीने के दूसरे जुमे की नमाज अदा कराई। उन्होंने तकरीर में कहा कि इस्लाम के मुताबिक रमजान के महीने को दस-दस दिन के तीन अशरों में बांटा गया है। पहले दस दिन रहमत का अशरा होता है। रमजान महीने के दूसरा अशरा मगफिरत अर्थात अल्लाह से अपने गुनाहों से माफी का शुरू हो गया। जो भी मुसलमान रमजान के रोजे रखता है। सच्चे दिल से अपने गुनाहों का प्रायश्चित करता है। अल्लाह उसके सारे गुनाहों को माफ कर देता है। रमजान के महीने में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। इस अशरे में गुनाहगारों की तौबा कुबूल की जाती है। इसलिए इस अशरे में रोजेदारों को अल्लाह से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगनी चाहिए। इस अशरे में पांचों वक्त की नमाज को नियमित रूप से पढ़ते हुए कुरान शरीफ को पढ़ने में मन लगाना चाहिए। भूखों को खाना खिलाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और रोजेदारों को इफ्तार कराएं। इससे खुदा राजी होकर अपने बंदों को दिल से मांगी हुई दुआ को कुबूल करता है।