महराजगंज। मानसून करीब है, लेकिन जिम्मेदार बांधों के रेनकट और रैटहोल भरने को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। जर्दी डोमरा बांध 22.70 किमी लंबा है। एक किमी में करीब 60-70 रेनकट और रैटहोल हैं। बारिश के समय अगर बाढ़ गई तो तबाही मचा सकती है। हालात यह है कि पिछले बारिश में हुए कटान का भी अभी तक भराव नहीं हुआ है। बांधों की दशा देखकर आसपास रहने वाले लोग सहमे हुए हैं।
पनियरा थाना क्षेत्र में बहने वाली रोहिन नदी की सुरक्षा के लिए बने जर्दी डोमरा बांध में जगह-जगह गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। पट्टू चौहान बड़हरा लाला के घर के सामने बांध पूरी तरह से कमजोर हो गया है। करीब चार वर्ष पूर्व बोल्डर पिचिंग का कार्य गया था, लेकिन बोल्डर जगह-जगह नदी के किनारे छोर पर उखड़ गया है। बड़हरा लाला गांव से लेकर सुचितपुर और अनंतपुर गांव तक के बंधे की दूरी लगभग पांच किलोमीटर है, जिसमें 100 से ज्यादा जगहों पर रैटहोल और रेनकट की भरमार है।
वहीं जर्दी डोमरा अतिसंवेदनशील बांध की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारी इसके सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते बांध की मजबूती को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई तो रोहिन नदी तबाही मचा सकती है।
बंधे पर आगे बढ़ने पर सुचितपुर गांव के बंगला टोले के पास जितेंद्र मिले। उन्होंने बताया कि जगह-जगह बंधा धंस गया है। बांध पर कई जगहों पर छेद हो गया है। रैटहोल एवं रेनकट बना हुआ है। यह कहते हुए आगे बढ़ गए। कुछ दूर बढ़ने पर सुचितपुर गांव के लालचन्द्र पासवान का घर दिखा। इनके घर के सामने बंधे की स्थिति बहुत दयनीय है। बांध की सुरक्षा को लेकर जो बोरियां लगाई गई है वह भी धंस गईं हैं। आसपास के लोगों ने कहा कि नदी का पानी बढ़ने पर बंधे के ऊपर चढ़ जाता है। ऐसे में जर्जर बंधे की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण भयभीत हैं। बड़हरा लाला गांव के राधेश्याम पासवान के घर के पास बांध पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। बंधे पर हर कदम पर कट दिखा।
पुरानी घटना से भी नहीं ले रहे सबक
वर्ष 2007 में बांध टूटने से रोहिन नदी ने हरखपुरा गांव में खूब तबाही मचाई थी। उसी दौरान नाव डूबने से उसमें बैठे 26 लोगों की मौतें हो गई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने इस हृदय विदारक घटना से सबक नहीं लिया। वर्तमान में बंधे की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बरते जाने से आसपास के लोग परेशान हैं। पुरानी घटना को सोचकर लोगों की रूह कांप जा रही है।