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Maharajganj News: यहां आसान नहीं है उद्योग लगाना, चढ़ावा नहीं मिला तो फाइल निरस्त

Sun, 04 Feb 2024 02:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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सदर तहसील में आते जाते लोग।संवादतहसील परिसर। 
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महराजगंज।
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जिले के एक व्यक्ति ने सदर तहसील क्षेत्र में एक दो साल पहले दो एकड़ कृषि जमीन खरीदी। वह यहां उद्योग लगाना चाहते थे। इसलिए उसे गैर कृषि योग्य कराना जरूरी था। सारी तैयारियों के बाद करीब चार महीने पहले उन्होंने जमीन को गैर कृषि योग्य घोषित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। लेकिन विभाग के एक अधिकारी ने इसके लिए प्रति डिसमिल सात हजार रुपये (दो एकड़ के लिए 14 लाख) रिश्वत मांगे। उद्यमी ने जब यह कहकर रिश्वत देने से मना कर दिया कि जब इतनी रकम आपको ही दे देंगे तो उद्योग कैसे लगाएंगे, तब उस अधिकारी ने उनके आवेदन को अपूर्ण बताते हुए लटका दिया, जिसके बाद 45 दिन पहले फाइल स्वत: खारिज हो गई। अब वह उद्यमी इधर-उधर भटक रहे हैं।
यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे न जाने कितने मामले तहसीलों में दबे पड़े हैं, जिसके पीड़ित आवाज तक नहीं उठा पाते। शासन ने यूं तो सारी प्रिक्रया ऑनलाइन कर दी है और हर आवेदन को अधिकारियों को 45 दिन के अंदर निपटान करना होता है। मगर यह सिर्फ कहने को है। तहसीलों में दलालों का नेटवर्क इतना हावी है कि उनके बिना कोई काम हो पाना लगभग असंभव है। और वे चाहें तो कोई भी काम मिनटों में करा दें।
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मालूम हो कि कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि की उद्घोषणा तहसील के उपजिलाधिकारी करते हैं। धारा 80 (2) में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए गैर कृषि भूमि की घोषणा की व्यवस्था की गई है। इसके लिए निचलौल तहसील में 15 आवेदक कतार में हैं तो सदर तहसील में 10 । सभी आवेदक जरूरी प्रपत्रों को पूरा करने में जुटे हैं। समय पूरा होने तक अगर प्रपत्र पूरे नहीं हुए तो फाइल स्वत: ही निरस्त हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार, असली खेल ऑनलाइन आवेदन के बाद शुरू होता है। आवेदन पर लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के नाम पर वसूली होती है। जिसकी सेटिंग हो गई उसका काम हो जाता है, जिसकी नहीं हुई उसकी फाइल कागज की कमी के नाम पर उलझा कर निरस्त करा दी जाती है।
पोर्टल पर पंजीकरण
अधिवक्ता दीनानाथ चौधरी ने बताया कि राजस्व संहिता की धारा 80(1) के अन्तर्गत राजस्व परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। आवेदन पत्र के पंजीकरण क्रमांक की सूचना आवेदक के मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से मिल जाता है। धारा-80(1) के आवेदन के ऑनलाइन दर्ज हो जाने के बाद आवेदक की ओर से आवेदन पत्र की कॉपी संबंधित उप जिलाधिकारी न्यायालय में आवेदनपत्र में जरूरी प्रपत्रों के साथ जमा करना पड़ती है।
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इस तरह से होती है जांच की प्रक्रिया

जांच अधिकारी की ओर से आवेदन पत्र में अंकित खातेदार, सह खातेदारों की व्यक्तिगत सूचनाएं, गैर कृषिक घोषणा के लिए भूमि से संबंधित सूचनाएं एवं भूमि के उपयोग आदि की राजस्व अभिलेखों से पुष्टि करते हुए जांच आख्या दो सप्ताह में तहसीलदार के माध्यम से उप जिलाधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत की जाती है। उपजिलाधिकारी गैर कृषिक घोषणा के लिए आवेदन पत्र में दी गई सूचनाओं और जांच अधिकारी की जांच आख्या व राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करते हैं। इसके बाद आवेदक द्वारा निर्धारित शुल्क कोषागार में जमा कराते हुए चालान की प्रति उपजिलाधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत की जाती है। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होगी।
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