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Maharajganj News: भारतीय किसान परेशान, नेपाल पहुंच रही यूरिया

Sat, 08 Jun 2024 04:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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साइकिल से यूरिया खाद को लेकर जाता युवक।
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महराजगंज/निचलौल। कुछ क्षेत्रों में धान की रोपाई शुरू हो गई है। भारतीय क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए परेशान हैं। वहीं तस्कर भारतीय यूरिया को तस्करी कर सरहद पार करने में लगे हैं। पिछले दिनों सरहद पर 12 बोरी यूरिया सुरक्षा एजेंसियों ने बरामद की थी। शुरुआती दौर में तस्कर साइकिल और बाइक से दो से चार बोरी ले जा रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, भारत नेपाल की सरहद पूरी तरह से खुली है। यहां बिना रोक-टोक के लोग इस पार से उस पार आते-जाते हैं। इस सुविधा का दुरुपयोग तस्कर पहले से करते चले आ रहे हैं। ये भारत और नेपाल में डिमांड और वस्तु की कमी के हिसाब से तस्करी करते हैं। मौजूदा समय में सरहद पर यूरिया और काॅस्मेटिक सामानों की तस्करी बढ़ी है। सुबह और शाम ढलते ही तस्कर खाद सरहद पार ले जाने का काम शुरू कर देते हैं।

हर बार की तरह इस बार भी तस्कर रोपाई शुरू होते ही भारतीय खाद को सरहद पार करने में लग गए हैं। तस्कर सुबह 10 से शाम करीब चार बजे तक इफको के डीलर और निजी खाद की दुकानों से बिना किसी कागज के खाद लेकर सरहद से सटे गांवों के पास डंप करते हैं। फिर दिन ढलते ही खाद को सरहद पार करने की जुगत में जुट जाते हैं, हालांकि खाद सरहद पार ले जाने की कोशिश करते हुए कई बार तस्कर सुरक्षा एजेंसियां के हाथ भी लग जाते हैं।
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वहीं क्षेत्र के किसान बाबूलाल चौहान, दिलीप सहानी, विवेक चौबे, कामेश्वर आदि ने कहा की जहां किसान एक-एक बोरी यूरिया के लिए परेशान हैं, तो वहीं तस्करों के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। आरोप है कि तस्करों के पास कागजात न हो तो भी ये दुकानदार बेधड़क यूरिया दे देते हैं और तस्करों से मोटा रकम वसूल करते हैं।
निचलौल कस्टम अधीक्षक रविंद्र तिवारी ने कहा की कहा कि सरहद पर तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ टीम लगी है। अगर सरहदी इलाकों में इस तरह की सूचना मिलती है। तो तस्कर के साथ- साथ दुकानदार पर भी कार्रवाई की जाएगी।


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नेपाल में दुकानों पर खुलेआम मिलती है भारतीय खाद
भारत में खाद के लिए किसान परेशान रहते हैं, लेकिन पड़ोसी देश नेपाल की दुकानों पर भारतीय खाद आसानी से मिल जाती है। छोटे-छोटे चौराहों पर दुकानदार खुले में भारतीय खाद की बिक्री करते हैं। भारतीय क्षेत्र में यूरिया की कीमत 280 और डीएपी की कीमत 1360 रुपये प्रति बोरी है। जो नेपाल पहुंचते ही यूरिया की कीमती लगभग 500 से 550 और डीएपी की कीमती 1600 से 1700 रुपये प्रति बोरी हो जाती है। तस्कर इतने चालाक होते हैं कि सुरक्षा एजेंसियों के लाख जतन के बाद भी पकड़ में नहीं आते हैं। कभी-कभार हाथ लगते भी हैं तो कैरियर। मुख्य तस्कर पकड़ में न आने से अंकुश नहीं लग पता है।

ऐसे होती है तस्करी
पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए तस्करों ने लग्जरी और अन्य गाडियों को लगाया है। दिन भर खाद लादकर सीमा क्षेत्र के गांव में इकट्ठा करते हैं। समय देखते ही नेपाल पार कर देते हैं। सीमा क्षेत्र के रेंगहीया, शीतलापुर, बहुआर, कनमिसवा, पथलहवा, लक्ष्मीपुर, ठूठीबारी, राजाबारी, बरगदवा, परसामलिक आदि गांव के अगल-बगल व पगडंडियों के रास्ते नेपाल भेजते हैं।
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