महराजगंज। जिले में अवैध खनन का खेल जारी है। अवैध खनन कर मिट्टी ईंट भट्ठों पर ठंप की जा रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण को खतरा है। इसके बाद भी प्रशासनिक और खनन विभाग के जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं। अवैध खनन से जहां किसान उपजाऊ भूमि को सुरक्षित रखने को लेकर चिंतित हैं वहीं हरियाली भी नष्ट हो रही है। मंगलवार को खनन माफिया ने वन दरोगा पर भी हमला कर दिया था।
नियमों के मुताबिक, परमिट देते समय ही यह तय किया जाता है कि किस जगह पर कितनी गहराई तक खनन कराई जा सकती है। अगर किसी जगह चार फीट खनन का परमिट है, तो वहां 20 फीट खनन कर दिया जाता है। इससे सरकार को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। शिकायत पर जांच होती है तो मामले को साठगांठ कर दबा दी जाती है। बचने के लिए तर्क दिया जाता है कि उस जगह पर पहले से 16 फीट गड्ढा था, इस वजह से 20 फीट गहरा हो गया।
निचलौल के जितेंद्र कुशवाहा, सत्येंद्र, मुकेश दुबे आदि ने कहा कि मानकों को नजर अंदाज करते हुए क्षेत्र में ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। इन्ही भट्ठों पर खनन माफिया उपजाऊ भूमि को जेसीबी से काफी गहराई तक खोदकर मिट्टी पहुंचा रहे हैं। वन क्षेत्र के आसपास मिट्टी खनन के दौरान हरे-भरे कीमती पेड़ भी जेसीबी से गिरा दिए जाते हैं। किसान राजू, सुबास पटेल, कमलेश सैनी आदि ने कहा कि इन दिनों खनन माफिया करमहिया, रामचंद्रही, लेदी, झरवलिया, ओडवलिया के अलावा जंगलों के किनारे उपजाऊ भूमि पर जेसीबी लगाकर अवैध खनन कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं।
वहीं रामचंद्रही गांव के पास हरे भरे पेड़ों के बीच जेसीबी मशीन से खनन माफिया अवैध खनन कर रहे हैं। इससे उपजाऊ भूमि खराब होने के साथ ही हरे-भरे कीमती पेड़ भी गिरकर नष्ट हो जा रहे हैं। करमहिया गांव के पास जंगल से सटे उपजाऊ भूमि पर जेसीबी मशीन लगाकर माफिया अवैध खनन जोर शोर से कर रहे थे। मिट्टी का अवैध खनन कर पतौना जंगल से सटे एक ईट भठ्ठे पर डंप किया जा रहा था। इसका विरोध करने पर हंगामा हो गया।
खनन के लिए परमिशन के ये हैं नियम
-परमिशन लेने वाले को ऐसी जगह से मिट्टी निकालनी होती है, जहां पर कोई सड़क, सार्वजनिक मार्ग, भवन या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान न हो
-तय मानक से अधिक मिट्टी निकालने पर यह अवैध खनन होगा
-परमिशन के बाद भी अगर सरकार, न्यायालय का कोई नया आदेश आएगा तो उसका पालन करना होगा
-खनन के आसपास के खेतों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए
-खनन वाली जगह पर अगर पेड़ हो तो उसे नुकसान न पहुंचे
-पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र के प्रभावी नियमों अधिसूचना एवं शर्तों के अनुसार खनन संविदा की जाएगी