महराजगंज। शहर में करीब 25 जुगाड़ गाड़ियां बिना रोकटोक के फर्राटा भर रही हैं। इनका न तो पंजीकरण है और न बीमा, साइलेंसर। प्रदूषण का प्रमाण भी नहीं है। सड़क पर न तो कोई इन्हें रोकता है और न चेक करता है। हर चौराहे पर मुस्तैद होने का दावा करने वाली यातायात पुलिस व सिविल पुलिस भी इन वाहनों को देखकर मुंह फेर लेती है। आए दिन यह वाहन कहीं न कहीं खराब होने पर पलट जाते हैं।
नियमानुसार कंपनी से मिलने वाले वाहन को मॉडिफाई कराकर दूसरी शक्ल देना गलत है। इसके बाद भी जनपद में यह कार्य तेजी से फल फूल रहा है। कोई बाइक को ठेला बनाकर सामान ढोने का काम कर रहा है तो कोई मैजिक को चलती फिरती दुकान बनाकर घूम रहा है। इतना ही नहीं कुछ लोग तो इंजन लगाकर ठेले को दूसरे रूप में तैयार कर उस पर अपनी दुकान चलाते हैं।
कोई गन्ने का जूस निकाल रहा है तो कोई उस पर सामान ढो रहा है। यह कार्य यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की आंखों के सामने हो रहा है। सबकुछ जानते हुए भी जिम्मेदार मौन हैं। जबकि अक्सर ऐसे वाहनों से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि अभियान चलाकर इनको पहले जागरूक किया जाएगा, इसके बाद सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।
13 हजार होता है खर्च
सड़कों पर फर्राटा भरने वाले जुगाड़ वाहन को तैयार करने में करीब 10 हजार रुपये खर्च होता है। अधिकतर पुराने स्कूटर व बाइक के इंजन के साथ छोटे ठेले और रिक्शा को जोड़कर जुगाड़ वाहन तैयार किया जाता है। बाजार में पुराना स्कूटर व बाइक चार से पांच हजार रुपये में मिल जाते हैं। इसमें जुड़ने वाला ठेला व थ्री व्हीलर की बॉडी पांच से छह हजार रुपये में मिल जाती है। इसके अलावा पहिए व वायरिंग का खर्च औसतन दो से तीन हजार रुपये बैठता है।
जुगाड़ पर ओवरलोडिंग
जुगाड़ वाहनों को दौड़ाकर सैकड़ों लोग अपने साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। इन वाहनों का प्रयोग सब्जी, लकड़ी, फर्नीचर, किराने का सामान सहित अन्य सामान लाने ले जाने में किया जा रहा है। कई बार इन पर ओवरलोड सामान भर लिया जाता है। इससे इनका बैलेंस बिगड़ने पर ब्रेक नहीं लगने का खतरा बना रहता है। ऐसा होने पर कभी भी हादसा हो सकता है।