महराजगंज। पुरंदरपुर क्षेत्र के तलाव टोला चांदीपुर में दस साल पहले हुई चचेरे भाई और भतीजी की हत्या की घटना शुक्रवार को ताजा हो गई। दोषी को फांसी की सजा मिलने से पीड़ित परिजनों ने राहत की सांस ली है। बंटवारे में मिली छह एकड़ जमीन ही विवाद का कारण बनी थी। हत्यारे बैजू को लगता था कि उसके परिवार से बेइमानी की गई। हत्या के तरीके से उसकी बौखलाहट का अंदाजा लगाया जा सकता था।
जानकारी के अनुसार, बंटवारे के वक्त बैजू की उम्र करीब पांच साल की थी। बैजू बड़ा हुआ तो उसे लगा की उसके साथ अन्याय हुआ है। बंटवारा सही होने के बावजूद बैजू को लगा की उसकी छह एकड़ जमीन चचेरे भाई राजेंद्र चौधरी ने ली है। जिसके हिस्से में जो मिला, उस वक्त सभी लेकर खामोश रहे। वक्त के साथ रिश्तों में कड़वाहट बढ़ी तो पूरी कहानी बदल गई।
दो अप्रैल 2014 को हुई घटना को चश्मदीदों ने बताया तो सबकी रूह कांप गई। न्यायालय में गवाह कलावती, माधुरी, कुबेर आदि ने पूरी कहानी बताई। बैजू धारदार हथियार लेकर घर में आया तो राजेंद्र चौधरी की बेटी ज्ञानती सहम गई थी। वह गांव के हरिराम विश्वकर्मा के घर में तख्त के नीचे छुप गई थी। बैजू इतना आक्रोशित था कि उसे तख्त के नीचे खींच लाया। दिनदहाडे़ चाकू से 73 बार वार कर उसे मार डाला।
बैजू इतना शातिर था की उसने शरीर में प्लास्टिक से बांध कर कई धारदार हथियार छुपा रखे थे। निर्मल चौधरी को 79 बार चाकुओं से गोंदा। उसकी निर्ममता देखकर हर कोई कांप गया। न्यायालय में 11 लोगाें ने बैजू के खिलाफ गवाही दी।