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Maharajganj News: जान जोखिम में डालकर नाव से स्कूल जाते हैं गुरु जी

Wed, 10 Jul 2024 04:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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रोहिन नदी में नाव चला कर विद्यालय जाते कम्पोजिट विद्यालय सेमरहवा के शिक्षक विन्जय प्रासाद।
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महराजगंज/लक्ष्मीपुर। सरकारी स्कूल, सरकारी टीचर, सरकारी पढ़ाई का ख्याल आते ही जो मन में धारणा बनती है, वो काफी हद तक नकारात्मक है। लेकिन इन सबसे दूर कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो आपके सारे पूर्वाग्रहों को दूर कर देंगे और आप भी इन शिक्षकों के जज्बे को सलाम करेंगे। जो खुद नाव से हर रोज समय से विद्यालय जाते हैं। इनका समर्पण समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
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महराजगंज जनपद के अति पिछड़े ब्लाॅक लक्ष्मीपुर के कंपोजिट विद्यालय सेमरहवा, प्राथमिक विद्यालय बेरीकुंडी, मरअहवा एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बेरीकुंडी जंगल के किनारे और रोहिन नदी पार एक टापू पर स्थित है। इन विद्यालयों के शिक्षक तमाम मुश्किलों के बावजूद जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते हैं और तब जाकर विद्यालय में पहुंचते हैं। इनको नाव से ही जाना पड़ता है। क्योंकि, आजादी के सात दशक बाद भी रोहिन नदी पर कोई पुल नहीं बन सका है।



सेमरहवा विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजय प्रसाद बताते हैं कि यहां तैनात अध्यापक संजय यादव, बृजेश जायसवाल, राहुल गुप्ता, रमेश कुमार, सौरभ त्रिपाठी, राजेश कुमार प्रजापति हर परिस्थितियों में विद्यालय समय से पहुंचते हैं। इस विद्यालय में वर्तमान में करीब 300 बच्चे हैं। जो इसी गांव के हैं। चूंकि गांव से बाहर जाने का कोई अन्य समुचित मार्ग नहीं है तो इसीलिए नाव ही एक सहारा है। जिससे लोगों का आवागमन होता है।
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सबसे दुर्गति बरसात के समय में होती है। जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है तो जान जोखिम में डाल कर विद्यालय जाना होता है। उन्होंने कहा कि अक्सर सुबह के समय नाव खुद चलाकर ले जाना पड़ता है क्योंकि सुबह में नाविक देर से आते हैं। ऐसे में नाव का सहारा लेना मजबूरी है क्योंकि इस स्कूल तक पहुंचने के लिए एक ही रास्ता है नदी पार कर जाना। नाव से उतरकर विद्यालय तक करीब दो किमी तक पैदल जाना यहां के शिक्षकों की मजबूरी होती है।

यही हाल प्राथमिक विद्यालय मरअहवा और बेरीकुंडी का भी है। प्राथमिक विद्यालय बेरीकुंडी के शिक्षक पंकज कुमार तिवारी, प्राथमिक विद्यालय मरअहवा के शिक्षक संतोष कुमार, गौरव सिंह एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बेरीकुंड के शिक्षक सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय जाने के लिए भी रोहिन नदी पार कर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। दूसरा रास्ता नहीं है। क्योंकि विद्यालय के तीन तरफ जंगल और एक तरफ रोहिन नदी है।
ग्रामीणों ने स्वयं के सहयोग से रखी है नाव नदी पर कोई पुल नहीं है। नाव ही सहारा है जो बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। ग्रामीण स्वयं के सहयोग से नाव रखे हैं। आवागमन का कोई और साधन नहीं है। गांव के लोग इनके हिम्मत और जज्बे को देख स्थानीय लोग इनका बहुत ही ज्यादा सम्मान करते हैं। इन शिक्षकों का समर्पण न केवल बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ा रहा है बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा बन रहा है। यह दिखाता है कि शिक्षा का कितना महत्व है और कैसे कठिन परिस्थितियों में भी ज्ञान की ज्योत जलती रहती है।
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भौगोलिक दृष्टि से सेमरहवा, मरअहवा व बेरीकुंडी के विद्यालय बहुत ही दुर्गम, दुरूह क्षेत्र में हैं। शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचते हैं।
-सुदामा, खंड शिक्षा अधिकारी, लक्ष्मीपुर
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