रामचरितमानस के प्रणेता व समन्वयवादी कवि हैं गोस्वामी तुलसीदास : प्रो. दिग्विजय नाथ
महराजगंज। रामचरितमानस के प्रणेता और समन्वयवादी कवि गोस्वामी तुलसीदास हैं। आज के युवाओं को गोस्वामी तुलसीदास और राम से प्रेरणा लेकर अपने कर्म में सम्मिलित करना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास ने जिस मर्यादा पुरुषोत्तम राम का गुणगान रामचरितमानस में किया है, वह अद्भुत है। राम के चरित्र से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
यह बात प्राचार्य प्रो. दिग्विजय नाथ पांडेय ने कही। वह बृहस्पतिवार को जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज सभागार में हिन्दी विभाग के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास को संयुक्त परिवार के निर्माण और उसमें अपेक्षित समायोजन के सूत्रधार के रूप में चित्रित किया। प्रो. उमेश प्रसाद यादव, धर्मेन्द्र कुमार सोनकर, डॉ. अजय कुमार मिश्र, मुख्य नियंता राहुल कुमार सिंह और हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राणा प्रताप तिवारी ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन परिचय और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की।
बीए तृतीय समेस्टर की छात्रा शिवांगी मिश्रा ने गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से अपनी बात कही। बीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र रितुराज सिंह ने राम और रामचरितमानस की प्रासंगिकता पर अपने विचारों को व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजय आनन्द मिश्र ने किया। डॉ. विपिन यादव, डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. केआर यादव, डॉ. दिवाकर सिंह, डॉ. अक्षय कुमार, डॉ. धर्मवीर, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. नंदिता मिश्रा, डॉ. नेहा, डॉ. ज्योत्सना पांडेय आदि मौजूद रहे।