फरेंदा। कस्बे के निरालानगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन आचार्य अच्युतानंद मिश्र ने भक्त विदुर का प्रसंग सुनाया। कथा का रसपान कराते हुए उन्होंने कहा कि जब भक्त निस्वार्थ भाव से भगवान के शरण में चला जाता है तो भगवान उसके तमाम अवगुणों को भुला कर उसका साथ अवश्य देते हैं। यदि व्यक्ति एक दिन में ईमानदारी से भगवान के लिए मात्र तीन घंटे निकाल दें तो बाकी के 21 घंटे में कभी संकट आ ही नहीं सकता। भक्त के ऊपर भगवान की अपार कृपा हमेशा बनी रहती है, जिस प्रकार भगवान दुर्योधन के छप्पन प्रकार के भोग को त्याग कर भगवान विदुर की कुटिया पर जाकर केले के छिलके को खाया। भगवान हमेशा सच्चे भक्त के वश में होते हैं। वह ऊंच-नीच, धनी-निर्धन, विद्वान, मूर्ख नहीं देखते है। आचार्य के प्रवचन को सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे। इस दौरान हरिद्वार श्रीवास्तव, प्रकाशिनी श्रीवास्तव, अमरेंद्र श्रीवास्तव, महेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. शुभम श्रीवास्तव, निवेदिता, बीना, प्रतिमा, संगीता, ज्योति उपस्थित रहे।