महराजगंज। हेलो...मामा जी मैं अनूप बोल रहा हूं...मेरा एक्सीडेंट हो गया है...मेरे खाते में पांंच हजार रुपये डाल दो। इस तरह की कॉल आए तो सावधान हो जाएं। यह आपका कोई रिश्तेदार नहीं बल्कि उसकी क्लोन की गई आवाज में साइबर ठग हो सकता है। साइबर अपराधी तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। इन दिनों आवाज बदलकर करीबियों का नाम लेकर रकम मांग रहे हैं। झांसे में आने वाले लोग रकम ट्रांसफर करने के बाद हाथ मलते रह जा रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के विकास के साथ ही इसके दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। एआई तकनीकि के जरिए साइबर अपराधी आवाज बदलकर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनकी रकम उड़ा रहे हैं। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह आवाज आपके रिश्तेदार के जैसी ही होगी, लेकिन बात ठग करता है। इसके लिए साइबर ठग एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस ने इससे बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। दरअसल साइबर ठगों ने एआई को ठगी करने का नया हथियार बनाया है। इसके लिए ये लोग पहले सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की आवाज सुनते हैं। इसके बाद एआई का इस्तेमाल कर उसकी आवाज से मिलती जुलती आवाज तैयार करते हैं। फिर इस आवाज में एक वॉयस मैसेज तैयार किया जाता है।
ऐसे करें बचाव
-कॉल आने पर सबसे पहले उस पर शक करें। उससे कहें कि अभी दो मिनट में फोन करूंगा। इसके बाद संबंधित रिश्तेदार को कॉल कर पुष्टि कर लें।
-कॉल करने वाले से अपने परिवार की गोपनीय जानकारी पूछें। पिता-माता का नाम तो वह किसी भी दस्तावेज से ले सकता है, लेकिन दादा-दादी या नाना-नानी का नाम नहीं जानता होगा।
-बचपन या किसी घटना से संबंधित ऐसी बात पूछे जिसे सिर्फ परिवार वाले ही जानते हैं।
-एकाएक खाते में पैसे न ट्रांसफर करें। पहले खाते आदि के बारे में जानकारी कर लें। ताकि यह पुष्टि हो जाए कि आप किसी गलत खाते में पैसे तो नहीं भेज रहे हों।
-किसी अनजान मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड या बैंक खाते में रकम बिल्कुल भी न भेजें।
-ठगी का शिकार हो जाए तो 1930 पर कॉल कर शिकायत दें या cybercrime.gov.in शिकायत करें।
अपने नजदीकी साइबर थाने जाकर भी शिकायत की जा सकती है।