महराजगंज। बदलते मौसम और तापमान के उतार-चढ़ाव से बीमारियों ने हर आयु वर्ग के लोगों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। पिछले 15 दिन से बुखार पीड़ितों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। बुखार की समस्या शुरू होते ही लोगों को यह भय सताने लगता है कि कहीं डेंगू के कारण तो बुखार नहीं हो रहा है। हालांकि, जांच के बाद मौसमी बुखार ही पाया जा रहा है। लेकिन, इसमें मरीजों को अन्य तरह की परेशानी जैसे गले में दर्द, खांसी, मुंह में छाला, आंख में इन्फेक्शन व भूख न लगने की समस्या भी देखी जा रही है। दवा सेवन के बाद भी बुखार का प्रकोप पूरे सप्ताह तक मरीजों को प्रभावित कर रहा है। अक्तूबर का आखिरी सप्ताह चल रहा है, लेकिन तापमान में एकरूपता न होने का असर सेहत पर पड़ रहा है। सुबह-शाम जहां मौसम का पारा लुढ़क रहा है तो दोपहर के समय लोगों को गर्मी महसूस हो रही है। ठंड-गर्म का यह मौसम हर आयु वर्ग के लोगों को बीमार बना रहा है। सर्वाधिक असर बच्चों व बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। शनिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ अधिक रही। लोग ओपीडी में अपने बच्चों को भी इलाज के लिए लेकर पहुंचे थे। अधिकतर छोटे बच्चों में निमोनिया की पुष्टि हुई। 21 बच्चों में कफ की अधिकता से दिक्कत थी। अन्य आयु वर्ग के लोगों में बुखार के साथ गले में दर्द, खांसी, इंफेक्शन के चलते आंख में चुभन, मुंह में छाला पड़ने की समस्या मिली। 37 मरीज ऐसे भी आए, जिन्हें बुखार की समस्या के चलते दवा सेवन करना पड़ रहा है, लेकिन उन्हें भूख न लगने व सिर तथा मांसपेशियों में लगातार दर्द की समस्या उत्पन्न हो गई है। शनिवार को लगभग 800 से अधिक मरीजों का उपचार के लिए पहुंचे थे। चिकित्सकों ने खून की जांच रिपोर्ट देखकर बुखार और अन्य समस्याओं की दवाएं दे रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वायरल फीवर की दवा से भूख में कमी आना और स्वाद न महसूस होना स्वाभाविक है। बुखार ठीक होने के बाद यह समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं। बदलते तापमान को देखते हुए खान पान व पहनावे पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सीएमएस डाॅ. एपी भार्गव ने कहा कि ओपीडी में आने वाले हर बुखार पीड़ित की जांच के बाद ही दवा उपलब्ध कराई जा रही है। बुखार के साथ अन्य समस्याएं भी दो से तीन दिन में ठीक हो जाती हैं, घबराने की जरूरत नहीं है।