बाजार में 120 रुपये से लेकर 800 रुपये तक का चश्मा है उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। आई फ्लू के कारण शहर में तीन दिन के अंदर पांच लाख रुपये के चश्मे बिक गए। बचाव के लिए हर कोई चश्मे का प्रयोग कर रहा है। बाजार में 120 से 800 रुपये तक का चश्मा उपलब्ध है। लोग अपनी जरूरत के अनुसार चश्मे की खरीद कर रहे हैं। बाजार में बच्चों के लिए काला चश्मा उपलब्ध नहीं है।
जिले में तेजी से आई फ्लू का संक्रमण फैल रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आई फ्लू की गिरफ्त में आ रहे हैं। आई फ्लू से बाजार में एंटीवायरल व एंटीबैक्टीरिया आई ड्रॉप और चश्मा की खपत काफी बढ़ गई है। आई फ्लू के मरीजों को चश्मे से की कमी से जूझना पड़ रहा है। छोटे बच्चों के चश्मे ऑर्डर करने के बावजूद भी नहीं मिल पा रहे हैं।
बरसात के मौसम में नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में आई फ्लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी के ओपीडी में आंखों के संक्रमण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। बच्चों से लेकर हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी के कारण चश्मे का बाजार भी चमक गया है। बाजार में धूप व अन्य चश्मों की मांग तेजी से बढ़ी है। सामान्य तौर पर बिकने वाले चश्मे भी अब दोगुनी कीमत पर बाजार में बिक रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार पिछले तीन-चार दिनों में ही जिले में पांच लाख चश्मे बिक चुके हैं।
चश्मा दुकानदार राहुल गौड़ का कहना था कि गर्मी में हमेशा चश्मा की बिक्री रहती है, लेकिन आई फ्लू के संक्रमण के चलते चश्मा की बिक्री अचानक 35 से 40 प्रतिशत बढ़ गई है। हर जगह बीमारी बढ़ने से माल कम मिलने से कीमतों में भी कुछ इजाफा हुआ है। दुकानदार आकाश पटवा, लाल बाबू, अभिषेक ने बताया कि लोगों की मांग के अनुसार चश्मे नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में 250 से अधिक की ओपीडी होती है। जिसमें आजकल 50 प्रतिशत आई फ्लू के मरीज आ रहे हैं। नेत्र सर्जन की मानें तो तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इससे हवा में मौजूद गंदगी आंखों में जा रही है, जिसकी वजह से आंखों में संक्रमण हो रहा है। इसे कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। इसमें आंखें लाल हो जाती हैं और उनसे पानी गिरने लगता है। अगर यह समस्या ज्यादा दिनों तक रहती है तो रोशनी कमजोर हो जाती है। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी एक से दूसरे में तेजी फैलती है। यही कारण है कि स्कूलों में बीमार छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। छात्र एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और तेजी से उनकी आंखों पर असर पड़ता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन वर्मा का कहना है कि प्रतिदिन 100 से ज्यादा आई फ्लू के मरीज आ रहे हैं। कंजक्टिवाइटिस तेजी से फैलता है। इसके वायरस लंबे समय तक सतहों पर रह सकते हैं। संक्रमित सतह दरवाजे की कुंडी, बेडशीट, दरवाजे, तौलिया, रूमाल आदि के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। सभी लोगों को इस संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।