पहले शुद्धता परखें फिर खाएं बाजार की मिठाई और नमकीन
महराजगंज। यदि बाजार से खाद्य पदार्थ ले रहे हैं, तो उसकी शुद्धता की परख जरूर कर लें। पांच माह में खाद्य पदार्थों (पनीर, दूध, बेसन, मिठाई, खोवा, नमकीन आदि) के 157 नमूनों में से 56 फीसदी फेल हो गए हैं। इनमें से पांच सेहत के लिए हानिकारक थे। हालांकि, अधिकतर ऐसे थे जो सेहत के लिए नुकसानदायक तो नहीं थे, लेकिन फायदेमंद भी नहीं थे।
जानकारी के अनुसार, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने एक अप्रैल से 31 अगस्त तक 485 जगहों का निरीक्षण किया। इस दौरान पनीर, दूध, बेसन, मिठाई, खोवा, नमकीन आदि के 157 नमूने लिए। जांच रिपोर्ट मिली तो पता चला 17 खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर सही सूचना नहीं अंकित की गई थी। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के अनुसार पैकेटों पर स्पष्ट और सही सूचना अंकित किया जाना जरूरी होता है।
वहीं, 67 नमूने अधोमानक पाए गए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, अधोमानक सामग्री सेहत को नुकसान नहीं पहुंचती है, लेकिन फायदा भी नहीं होता है। मसलन, अगर दूध में पानी मिला है, तो सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन फायदा भी नहीं होगा। जबकि पांच खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट असुरक्षित पाई गई है। इनमें कचरी और मटर शामिल हैं। कचरी में मानक से अधिक रंग मिलने पर असुरक्षित के दायरे में रखा गया। मटर में घुन मिला था। इससे सेहत पर कुछ खास असर नहीं होता है, लेकिन खाद्य पदार्थ का स्वाद खराब हो जाता है।
नौ लाख 11 हजार रुपये जुर्माना वसूला
खाद्य पदार्थों के नमूने मानक के अनुसार नहीं मिलने पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अपर जिलाधिकारी न्यायालय में 70 वाद दाखिल किया था, जिसमें से 58 का फैसला हो गया। इससे नौ लाख 11 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया।
विभाग ने कार्रवाई तेज की
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्ती करते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। शुद्ध खाद्य पदार्थ का सेवन करने के लिए विभाग की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच समय-समय पर की जाती है। टीम अचानक छापा डालकर कार्रवाई करती है। मोबाइल प्रयोगशाला के माध्यम से लोगों द्वारा लाए गए खाद्य पदार्थों की जांच मुफ्त में की जाती है।
लाइसेंस बनाने से 13 लाख से अधिक बढ़ा राजस्व
खाद्य सुरक्षा अधिकारी सदर अमित कुमार पांडेय ने बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 306 नए लाइसेंस और 1823 पंजीकरण कराया है। इससे 13 लाख 57 हजार रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है। विभाग की तरफ से खाद्य कारोबारियों को जागरूक करने के लिए 17 कैंप और 11 स्कूलों में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। 10 स्कूलों का निरीक्षण कर दोपहर के भोजन का 15 नमूने लिए गए। 14 मीट की दुकानों की जांच में 13 का चालान किया गया।
11 लीटर जले तेल को नष्ट कराया
खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीराम मौर्य ने बताया कि विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान दुकानों पर 11 लीटर जला तेल मिलने पर उसे नष्ट कराने के साथ चेतावनी भी दी। मशीन से तेल की गुणवत्ता जांच की गई। 27 नमूनों में से पांच मानक के अनुरूप नहीं मिले।
मोबाइल प्रयोगशाला से मिला लाभ
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अंकिता ने बताया कि जिले में मोबाइल प्रयोगशाला का लाभ लोगों को मिल रहा है। फूड सेफ्टी व्हील के जरिए 23 नमूनों की जांच लोगों ने स्वयं कराई। इनमें चार नमूने ठीक नहीं मिले तो लोगों को परखने की प्राथमिक जानकारी देकर अधिकारियों ने जागरूक किया। तीन स्थानों पर 100 कारोबारियों एवं जवाहर नवोदय विद्यालय में भी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
एक अप्रैल से 31 अगस्त तक हुई कार्रवाई के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की परख की गई। रिपोर्ट में मानक के अनुरूप खाद्य पदार्थ नहीं मिलने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ एडीएम न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। जिस पर नौ लाख 11 हजार जुर्माना वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराया गया।
- ब्रजेंद्र शर्मा, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा द्वितीय