फसल की सुरक्षा में किसानों का जीवन असुरक्षित
तेंदुए के भय से रात में किसान नहीं करते निगरानी
सब्जी की फसल बर्बाद कर देते हैं जंगली जानवर
महराजगंज। एक एकड़ खेत में सब्जी की फसल लगी है। इसकी सुरक्षा में जीवन ही असुरक्षित लग रहा है, लेकिन रोजी रोटी का सवाल है, क्या किया जाए? रात को में खेत की तरफ आने से डर लगता है। बीते दिनों आबादी की तरफ तेंदुआ आ गया था, इससे अब डर लग रहा है। कई बार खेत के किनारे तेंदुआ दिखा, लेकिन आबादी की तरफ नहीं आया। फसल की सुरक्षा करने में हर पल खतरे की आशंका रहती है।
यह कहते हुए रामनगर गांव के पोखरहवा टोले के रहने वाले संदीप कुमार मौर्य खेत की रखवाली में होने वाली समस्याओं का जिक्र करने लगे। वह खेत में बनी झोपड़ी में बैठकर सब्जी की फसल की निगरानी कर रहे थे। बताया कि खेतीबाड़ी कठिन समस्या है। इस बार मौसम ने भी साथ नहीं दिया। किसी तरह सब्जी की फसल तैयार हुई तो जंगली जानवर बर्बाद कर दे रहे हैं। इनसे फसल को सुरक्षित रखने में स्वयं जान जोखिम में डालना पड़ रहा है। एक एकड़ भूमि में बोड़ा, करैला, नेनुआ की खेती हुई है। वह छह भाइयों में सबसे छोटे हैं।
इसी तरह से राजेंद्र कई लोगों के साथ जंगल के किनारे लाठी-डंडे लेकर सब्जी की खेती की रखवाली करते मिले। उन्होंने कहा कि वह 50 डिस्मिल खेत में करैला, कुनुरु, बोड़ा की खेती की है। तीन लड़के हरिदीन, श्यामदीन तथा रामदीन हैं। राजेंद्र ने बताया कि उनके खेत के पास बांस के करीब एक सप्ताह से तेंदुआ लगातार आ रहा है। रात में खेत की तरफ जाना बंद कर दिया। राधेश्याम मौर्य ने बताया कि वह एक एकड़ भूमि में करैला, मूली, बोड़ा, गोभी की खेती हुई है। जंगल से सटे होने से हमेशा तेंदुआ के आने का भय बना रहता है।
झोपड़ी में लाठी-डंडा लेकर बैठे रामरेखा फसल की रखवाली करते दिखे। रामरेखा ने बताया कि एक एकड़ खेत में नेनुआ, करैला, बोड़ा की खेती की है। चार दिन पहले रात में लगभग दो बजे तेंदुआ आबादी की तरफ आ रहा था, कुत्तों के भौंकने से जंगल की तरफ चला गया। बुद्धिराम ने बताया कि 25 डिस्मिल भूमि में करैला नेनुआ की खेती की है। चंद्रज्योति ने बताया कि 50 डिस्मिल भूमि में बोड़ा की खेती है। तेंदुए के भय से खेत की तरफ कोई नहीं जाता है। रामजीत, जगरनाथ, जयराम, वीरेंद्र, केशव, शिवनाथ आदि किसानों ने बताया कि तेंदुए के भय से रात में खेत की रखवाली नहीं हो पा रही है। जंगली पशु फसल बर्बाद कर दे रहे हैं।
यह हैं जंगल के किनारे बसे गांव
उत्तरी चौक रेंज के जंगल से सटे गांव चकदह का मनिकापुर, बेलभार, महुलैना, घरोही,शाहपुर तथा मगरभौली, रामनगर गांव का पोखरहवां टोला, हनुमानगढ़िया, कुसमहवा, बरतानी, चरैया, भठवा, कजरी, चुड़िहारी, करौता, गंगावलिया, सेमरहवा, चकदह, रामनगर, हनुमानगढ़िया आदि गांव हैं। करीब दो सौ एकड़ में सब्जी की खेती हुई है।
लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जंगल के किनारे वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। लोगों ने अपील है कि अकेले खेत की तरफ न जाएं। जंगल के किनारे तार बाड़ लगाने की अभी कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को बचाव के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। -रामबरन यादव, रेंजर, उत्तरी चौक
अक्सर जंगल से निकलते हैं तेंदुए
-17 अप्रैल 2021 लक्ष्मीपुर रेंज के पिपरा सोहट के मैरी गांव में तेन्दुए खेत में काम कर रहे दो किसानों को घायल कर दिया था।
-8 अगस्त 2020 को ग्राम सभा बड़हरा चरगहां में झोपड़ी की टाट को फाड़ कर तेंदुआ अंदर घुस गया और घर में बंधी बकरी पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया।
-25 अप्रैल2020 को जंगल से सटे गांव बड़हरा चरगहा के टोला छावनी निवासी विनोद चौहान के झोपड़ी में बंधी एक बकरी को तेंदुआ मार जंगल में उठा ले गया था।
-26 मई 2020 को निचलौल रेंज के उत्तरी बीट से सटे रामचन्द्रही में केले के खेत मे काम कर रहे लोगों पर तेंदुआ ने दिनदहाड़े हमला बोल दिया था। जिस दौरान संदीप, राजन, सुदर्शन,गजेंद्र मौर्य,गणेश गौंड़ गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- 28 नवंबर 2021 को बरतानी टोला के एक बालक को मार डालने के साथ ही रात में ही गाय को घायल कर दिया।
-11 अगस्त 2022 को उत्तरी चौक रेंज के घोड़ाहवा बीट के जंगल से सटे गांव चकदह टोला बेलभार के गांव के पिंटू यादव का 10 वर्षीय बेटा अमित यादव को तेंदुए ने मार डाला