पांच साल में लग चुके हैं 96 लाख के अधिक पौधे, रखरखाव के प्रति नहीं दिया जाता ध्यान
तमाम स्थानों पर लगे पौधों का पता नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर में पिछले साल तमाम स्थानों पर पौधरोपण किया गया था। इनमें अधिकतर स्थानों पर पौधे सूख चुके हैं। कुछ स्थानों पर ट्री-गार्ड के अभाव में पौधे टूट गए। इससे शहर में हरियाली का सपना धराशायी हो चुका है। पौधों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पौधों को लगाने के दौरान बहुत तेजी दिखाई जाती है, लेकिन सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं होने के कारण वक्त के साथ पौधे सुख जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष कलक्ट्रेट के सामने खाली जमीन पर पौधे रोपे गए थे। चारों तरफ पौधों को लगाने में विशेष रुचि दिखाई गई। वक्त गुजरने के साथ पौधे बीमार होते गए। इन दिनों में परिसर में सिर्फ बगैर पत्ते वाले डंठल दिखते हैं। चारों तरफ सूखे हुए पौधे दिखते हैं। बीते पांच साल में करीब 96,47,614 पौधे लगाए जा चुके हैं।
जिले में 428.201 वर्ग किमी वन क्षेत्र का दायरा है। हर साल जितने पौधे लगते हैं, अगर वे सुरक्षित रह जाएं तो चहुंओर हरा भरा दिखेगा। कलक्ट्रेट के सामने खाली जमीन के अलावा विकास भवन व कलक्ट्रेट की चहारदीवारी के सामने लगे कुछ पौधे सूख रहे हैं। उनके रखरखाव के प्रति ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
रविवार को पड़ताल के दौरान कलक्ट्रेट के दूसरे गेट व विकास भवन के गेट के पास एक एक पौधा सूखा हुआ दिखा। परिसर में अन्य कई स्थानों पर रोपे गए पौधे दिखते ही नहीं है। सदर तहसील की चहारदीवारी के किनारे भी पौधा लगाया गया था, लेकिन वर्तमान में वे पौधे सूख रहे हैं।
...
पौधों को लगाने में ज्यादा रुचि दिखाई जाती है, लेकिन सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले में हरियाली सिर्फ कागजों में दिखती है। हकीकत में पौधे सूख जाते हैं। अब तक जितने पौधे लगे हैं, अगर वे सभी बच गए होते तो हर तरफ हरियाली दिखती।
आदित्य राज, सुभाष नगर
...
अधिकारियों की कथनी-करनी में बहुत फासला है। पौधों को लगाने के बाद नियमित पानी नहीं डालने से सूख जाते हैं। जिले में तमाम स्थानों पर लगे पौधे देखरेख के अभाव में सूख चुके हैं। वहां किसी की नजर नहीं पड़ती है।
मनोज सिंह, हमीद नगर
...
कोट
पौधों की सुरक्षा के प्रति हमेशा ध्यान दिया जाता है। अगर कहीं पौधे सूख रहे हैं तो उनके स्थान पर नए पौधे लगा दिए जाएंगे। अभियान के दौरान अधिक से अधिक पौधरोपण के प्रति जागरूक किया जाता है।
सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
..
वन विभाग की पौधशाला में तैयार हो रहे 14 लाख 20 हजार पौधे
निचलौल। वन विभाग की मधवलिया और निचलौल वन रेंज के चार पौधशाला में इस वर्ष सागौन, यूकेलिप्टस, जामुन, असना, अमरुद, सेमल, आम, सहजन, आंवला, बेल, बरगद, पीपल सहित अन्य प्रजाति के 14 लाख 20 हजार पौधे तैयार किये जा रहे हैं। जिसे शासन के निर्देश पर जुलाई में पौधरोपण के लिए वितरण किया जाएगा। रेंजर सुनील राव ने बताया कि मधवलिया पौधशाला में 3 लाख, बसौली बीट के पौधशाला में 1 लाख 20 हजार, मधवलिया रेंज परिसर स्थित पौधशाला में 3 लाख और निचलौल रेंज के डोमा पौधशाला में 7 लाख सहित कुल 14 लाख 20 हजार पौध तैयार की जा रही है। जिनमे फलदार,फूलदार व छायादार पेड़ पौधे भी शामिल है। इन्होंने बताया कि वर्तमान में पौध की लंबाई तीन से चार फीट ऊंची हो चुकी है। मानसून की दस्तक के बाद शासन की निर्देश पर जुलाई में इन पौध की वितरण शुरु की जाएगी। तब तक पौधों की लंबाई 5 से 6 फीट के करीब हो जाएगी।
...
पौधों की देखरेख करना हो रहा मुश्किल
इन दिनों तेज गर्मी के बीच पौधे तैयार करना और उसकी देखरेख करना काफी मुश्किल भरा काम है। ऐसे में वनकर्मी समय-समय पर खाद व पानी देकर उनको न केवल जिंदा रखते है। बल्कि उनको विकसित करने का वातावरण भी बनाते है। पौधशाला में मांग के अनुसार विभिन्न किस्मों के पौधे तैयार किए गए हैं।