मोटी कमाई के मोह में फंसे डॉक्टर मरीजों को दे रहे धोखा, बड़े डॉक्टर का नाम बताकर करते हैं भर्ती, इलाज करता कोई और
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में कई अस्पताल मुन्ना भाई जुुगाड़ तंत्र से चला रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टर हैं ही नहीं और उनके नाम पर रजिस्ट्रेशन है। ये डॉक्टर किसी और शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और अपने नाम से रजिस्ट्रेशन के एवज में हर माह लाखों रुपये मुन्ना भाई से लेते हैं। इस बात का खुलासा भी हो चुका है। इसके बाद भी मुन्ना भाई और एमबीबीएस डॉक्टरों का गठजोड़ फल-फूल रहा है। शहर के अलावा परतावल, पनियरा इलाके में 30 से 35 फीसदी अस्पताल इसी तरह से चलाए जाने की चर्चा है।
महराजगंज शहर में नहर रोड पर एक अस्पताल है, वहां भी डॉक्टर नहीं दिखते हैं। बताया जाता है कि उस अस्पताल पर कार्रवाई हुई थी। फिर भी विभाग की मेहरबानी से संचालित हो रहा है। खास बात यह है कि डॉक्टर जिस अस्पताल को अधिकृत करते हैं, वह वहां खुद न रहकर गोरखपुर या अन्य शहर में रहते हैं। मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। मुन्ना भाई अस्पताल वाले इसी तरह से जुगाड़ बनाकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि ऐसे अस्पतालों से स्वास्थ्य विभाग की सेटिंग है। इस वजह से नियम-कानून का पेच फंसा कर बचा दिया जा रहा है। जिस डॉक्टर को बोर्ड पर दिखाकर मरीजों को भर्ती किया जाता है, असल में वही डॉक्टर नहीं होते हैं। तजुर्बा लेकर डॉक्टरी करने वाले मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं।
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कमीशन के खेल में सिस्टम फेल
इस खेल के एक अहम किरदार एंबुलेंस चालक भी हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लाने पर मुन्ना भाई ने उनका कमीशन तय कर रखा है। एंबुलेंस चालक को मरीज के हिसाब से रुपये मिलते हैं। गंभीर सर्जरी वाले मरीजों का रेट सबसे अधिक है। ऐसे मरीज लाने पर एंबुलेंस चालकों को 15 से 20 हजार, छोटी सर्जरी वाले मरीजों के लिए 10 से 12 हजार और सामान्य मरीजों को लाने पर पांच से आठ हजार रुपये तय हैं। इसके लिए एंबुलेंस चालक बिहार, पूर्वांचल के आसपास जिलों के कस्बों और ग्रामीण इलाकों के मरीजों को फांसते हैं। अच्छे इलाज का झांसा और सरकारी अस्पतालों में अधिक भीड़ दिखाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं।
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शपथ पत्र देने का है नियम
अस्पताल के पंजीकरण के दौरान जिस डॉक्टर का नाम रहता है, वह शपथ पत्र देता है। शपथ पत्र में इस बात का जिक्र रहता है कि वह अस्पताल में बैठेगा और मरीजों का इलाज करेगा। इसके अलावा इमरजेंसी में किसी भी समय इलाज के लिए उपलब्ध रहेगा। शपथ पत्र देने के बाद भी बड़ी संख्या में डॉक्टर अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में नहीं बैठ रहे हैं।
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केस नंबर एक
श्यामदेउरवां-बड़हरा मार्ग पर एक अस्पताल का भी यही हाल है। यहां लगे बोर्ड पर एक महिला तथा एक पुरुष डॉक्टर का नाम लिखा है। डॉ. एम काशिफ लारी (बीयूएमएस, फिजिशियन एंड सर्जन), डॉ. सना खुर्शीद (बीयूएमएस, स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ) का नाम है। क्लीनिक पर कोई डॉक्टर नहीं मिले। फोन से बात करने पर पता चला कि वह गोरखपुर जिले के भटहट स्थित अपने दूसरे ब्रांच पर हैं। कभी-कभार यहां आते हैं।
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केस नंबर दो
परतावल-कप्तानगंज मार्ग पर नहर पुलिया से पहले एक क्लीनिक है। क्लीनिक पर लगे बोर्ड पर डॉ. अफरोज आलम, डॉ. अमरेंद्र कुमार का नाम लिखा है। डॉ. अफरोज आलम के बैठने का समय प्रत्येक सोमवार को तीन से रात आठ बजे तक है। डॉ. अमरेंद्र कुमार के बैठने का समय मंगलवार व शनिवार सुबह 10 से 11:30 बजे तक है। बोर्ड के नीचे फार्मा का बोर्ड भी लगा है। मेडिकल स्टोर पर उपस्थित गौरव कुमार मिश्रा ने बताया कि मरीजों की संख्या के अनुसार डाॅक्टर को बुलाया जाता है। गंभीर मरीजों को गोरखपुर हाॅस्पिटल में भर्ती कराया जाता है।
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केस नंबर तीन
परतावल-पनियरा मार्ग पर महादेवा चौराहे पर संचालित एक हाॅस्पिटल के बोर्ड पर चार डॉक्टरों का नाम लिखा हैं। लोगों के अनुसार हाॅस्पिटल में एक झोलाछाप इलाज करता है। हाॅस्पिटल के बोर्ड पर डॉ. एएच खुसुरू (एमबीबीएस, एमएस, जनरल सर्जन), मो. परवेज (बीयूएमएस जनरल फिजिशियन) डॉ. एएच खान (एमबीबीएस, डीए, एफसीसीपी, जनरल फिजिशियन), डॉ. शहाना खान (बीयूएमएस, गायनी, ओबीएस) नाम लिखा है। अस्पताल में मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि सभी डॉक्टर अभी बाहर हैं। एक महीने बाद ही आएंगे । उससे यह पूछा गया कि जब डॉक्टर नहीं हैं तो हाॅस्पिटल क्यों खुला है? इसका जवाब उसके पास नहीं था। उसने बताया कि वह हाॅस्पिटल की रखवाली करता है।
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केस नंबर चार
पनियरा थाना के मुजुरी बाजार में एक अस्पताल में डॉ एपी मल्ल एमबीबीएस का नाम लिखा है। नर्सिंग होम डॉ. मोहम्मद अफजल खांन बीयूएमस के भरोसे संचालित हो रहा है। जबकि डॉ एपी मल्ल गोरखपुर में एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करने के साथ कोई तैयारी कर रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों को इलाज स्थानीय स्तर पर किया जाता है।
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कागजात नहीं मिलने पर अस्पताल की ओटी हुई थी सील
नौ मई 2023 को परतावल-महराजगंज मार्ग पर धरमपुर भैंसा पुल के पास संचालित गीता हॉस्पिटल को एसीएमओ डॉ राजेंंद्र प्रसाद ने सील कर दिया। एसीएमओ को शिकायत मिली थी कि यह अस्पताल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है। एसीएमओ ने सीएचसी परतावल के अधीक्षक के साथ अस्पताल पर छापा मारा था। इस दौरान संबंधित अस्पताल के संबंध में कोई कागजात नहीं पेश किया गया। यहां छह मरीजों का इलाज किया जा रहा था। अधिकारियों ने वहां भर्ती मरीजों को सीएचसी पहुंचाकर हॉस्पिटल की ओटी को सील कर दिया था।
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कोट
नियम के अनुसार अस्पतालों का संचालन कराया जा रहा है। समय-समय पर जांच की जाती है। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाती है। अगर कहीं निमय का उल्लंघन हो रहा है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी