फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: डॉक्टर गोरखपुर के...यहां हो गया अस्पताल का पंजीकरण

Sat, 16 Mar 2024 01:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
पनियरा में संचालित हो रहा अस्पताल। 
विज्ञापन
महराजगंज। जिले में अस्पतालों के पंजीकरण में झोल है। जिस डॉक्टर के नाम से अस्पताल पंजीकृत है। असल में वह डॉक्टर मौके पर नहीं मिलते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच में मामला पकड़ में आता है तो कार्रवाई की जाती है। बोर्ड पर बड़े-बड़े नाम लिखे होते हैं, लेकिन असल में वे लोग सिर्फ नाम के हाेते हैं, काम कोई और करता है। भोले-भाले लोग झांसे में आकर रकम के साथ ही मुसीबत में फंस जाते हैं।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, जिले में 81 अस्पताल व 11 क्लिनिक पंजीकृत हैं। इन सभी में डाॅक्टरों का नाम दर्ज है। कुछ तो ऐसे हैं जो स्वयं डॉक्टर हैं, अपने नाम पर अस्पताल का संचालन कर रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे हैं जो गोरखपुर समेत अन्य शहरों से डॉक्टरों की डिग्री लेकर पंजीकरण कराने के बाद अपना धंधा चला रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अस्पताल का पंजीकरण कराने में जरूरी प्रपत्रों को एकत्र कर जमा कर दिया जाता है। इससे कागजात की जांच में मामला पकड़ में नहीं आता है।
गांगी बाजार में एक नीजी अस्पताल में गोरखपुर के डॉक्टर का नाम है। इसी तरह से समरधीरा में एक अस्पताल में जिस डॉक्टर का नाम है, वह अस्पताल में कभी नहीं मिलते हैं। सूत्र बताते हैं कि शहर में करीब चार पांच अस्पताल ऐसे हैं, जहां पंजीकृत डॉक्टर नहीं रहते हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की ओर से गड़बड़ झाले पर अंकुश लगाने के लिए डॉक्टर का नाम अस्पताल में चस्पा कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा डॉक्टर का मोबाइल नंबर, ऐलोपैथ के हैं, या आयुर्वेद के हैं, इसका जिक्र बोर्ड पर रहेगा। अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ का नाम भी अंकित करना है। यह कार्रवाई शुरू करा दी गई है। विभाग की ओर से इसकी जांच की जा रही है।
विज्ञापन

सूत्र बताते हैं कि परतावल क्षेत्र के परतावल चौक, महादेवा, हरपुर तिवारी, मंगलपुर, छपिया, श्यामदेउरवां, गोधवल आदि जगहों पर अवैध रूप से अस्पताल संचालित हो रहे हैं। गली मोहल्ले में शटर के अंदर अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन पर विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है।
अवैध अस्पतालों पर नकेल कसने में नियम में होता है झोल

अवैध अस्पतालों पर नकेल कसने में नियम में झोल होता है। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण के लिए आवेदन करने के 24 घंटे के भीतर बिना किसी जांच-पड़ताल के अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र मिल जाता है। सत्यापन के लिए 90 दिन का वक्त रहता है। इसी आधार पर अस्पताल संचालित होते हैं। अगर मामला पकड़ में आ जाता है तो कुछ दिन बाद दूसरे नाम से पंजीकरण हो जाता है। जिले में नर्सिंग होम, ओपीडी क्लीनिक, अल्ट्रासाउंड व एक्सरे क्लीनिक तथा पैथोलॉजी मिलाकर करीब 142 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें से लगभग 40 अस्पताल व जांच केंद्र डॉक्टरों के खुद के हैं, जबकि करीब 102 अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन अन्य पेशे से जुड़े लोग करते हैं। जिले में पंजीकरण से ज्यादा अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें