महराजगंज। पशु पालन विभाग में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी के कारण पशुओं के इलाज में परेशानी हो रही है। अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण पशुओं का समय से उपचार नहीं हो रहा है। 27 पशु चिकित्साधिकारी के सापेक्ष केवल 15 की तैनाती है। लंबे समय से विभाग में 114 पद खाली हैं।
69,602 गायों और 1.80 लाख से अधिक भैंसों सहित जिले में 2,49,700 पशु हैं। साथ ही 31 पशु चिकित्सालय, 20 पशु सेवा केंद्र, दो श्रेणी औषधालय संचालित हैं। अस्पतालों के बेहतर ढंग से संचालन के लिए उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के छह, पशु चिकित्साधिकारी के 27, वेटेनरी फार्मासिस्ट के 31, पशुधन प्रसार अधिकारी 22, ड्रेसर दो, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 76, इसके अलावा कार्यालय स्टाफ के 7 पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती केवल 57 स्टाफ की है। कर्मचारियों की कम संख्या के कारण परेशानी हो रही है। घुघली क्षेत्र के बसंतपुर और भिटौली में तो पशु चिकित्साधिकारी तैनात है लेकिन घुघली और खुशहाल नगर में कोई चिकित्सक न होने से यहां पशुपालकों को परेशानी हो रही है।
रोस्टर के अनुसार चलाई जाती है एंबुलेंस
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद विश्वकर्मा ने बताया कि जिले में दो एंबुलेंस संचालित है। एक आपातकाल के लिए चलती है। दूसरी एंबुलेंस ब्लाॅकवार रोस्टर के अनुसार पशुओं के उपचार में उपयोग की जाती है। रिक्त पदों की सूचना हर माह उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है।
दो पशु अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती नहीं
घुघली। क्षेत्र में कुल चार पशु चिकित्सालय संचालित हैं। इसमें केवल बसंतपुर और भिटौली में ही पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती है। विकास खंड कार्यालय के बगल में ही संचालित पशु अस्पताल और खुशहाल नगर पशु चिकित्सालय में कोई पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है।
पशु पालक हरी नारायण सिंह ने कहा कि जब पशु बीमार होते हैं तो इलाज में परेशानी होती है। बीमार पशुओं के इलाज के लिए यदि चिकित्सक की सलाह की जरूरत पड़ी तो उन्हें नहीं मिल पा रही है। पशुपालक महेंद्र सिंह और गुड्डू ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में यदि डॉक्टर व फार्मासिस्ट होते तो पशुओं के उपचार में परेशानी नहीं होती। घुघली क्षेत्र में करीब 14,000 पशु हैं जिसमें 6,000 गाय और 8,000 भैंस का पालन किया गया है।