महराजगंज। झुलनीपुर आने वाले दिनों में औद्योगिक हब के रूप में विकसित होगा। क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के साधन सृजित होंगे। इसके लिए गांव से सटी सिलिंग की भूमि की चिह्नित कर ली गई है। इससे जुड़ी पत्रावली को आगे बढ़ा दिया गया है। क्षेत्र के लोग उत्साहित हैं कि आने वाले दिनों में झुलनीपुर को औद्योगिक हब के रूप में जाना जाएगा, कोई यह नहीं कहेगा कि क्षेत्र से तस्करी होती है।
महराजगंज जिला मुख्यालय से निचलौल की ओर जाने पर 40 किमी सफर करने पर झुलनीपुर आएगा। यहां एसएसबी की बीओपी है। अब तो वहां तक पहुंचने के लिए सड़कें ठीक हो चुकी हैं। वर्तमान में क्षेत्र के लोगों का मुख्य कारोबार खेती है। लोग खेती करके परिवार का खर्च चलाते हैं। कुछ तो गांव में ही छोटी सी दुकान चलाकर जीविकोपार्जन करते हैं।
शुक्रवार को गांव में पहुंचने पर लोगों ने उद्योग लगने के बात छेड़ दी। कुछ जो सकारात्मक बातें करने लगे, लेकिन कुछ विरोधाभास करने लगे। झुलनीपुर गांव के दक्षिण तरफ करीब 40 एकड़ जमीन सीलिंग की है। अमडा उर्फ झुलनीपुर गांव में बुलकी, पोखरा, पश्चिम, सेमरहना, नौका सहित कुल सात टोले हैं। करीब 2,400 मतदाता हैं, जबकि गांव की आबादी लगभग 6500 के आसपास है। गांव के करीब 1,200 युवा रोजगार के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद में हैं। गांव के ज्यादातर लोग कृषि पर आधारित हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखने में सीलिंग की उक्त भूमि कृषि उपजाऊ है। झुलनीपुर नहर से सटे होने के कारण उक्त भूमि पर सिंचाई की भी सुविधा उपलब्ध है। सीलिंग की जमीन के उत्तर में भारत-नेपाल बॉर्डर और झुलीनपुर बीओपी की दूरी करीब तीन किलोमीटर तथा पश्चिम पंचमुखी शिव मंदिर की दूरी भी तीन किलोमीटर है।
वहीं दक्षिण की तरफ करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर करमहिया जंगल और पूरब की दिशा में नारायणी नदी और उससे सटे जंगल के बीच स्थित दर्जनिया ताल की दूरी चार किलोमीटर है।
आसपास बसे हैं यह गांव
झुलनीपुर गांव के आसपास अमडी, करमहिया, गुलरभार, मिश्रवलीया, बैठवलिया, बहुआर खुर्द, बहुआर कला, कनमिसवा, गेडहवा, भेड़ीयारी, ईटहीया, शीतलापुर खेसरहा, रेंगहिया आदि गांव हैं। औद्योगिक विकास होने से इन गांवों के लोगों को भी फायदा होगा।
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उद्योग लगेंगे तो क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति
महराजगंज। झुलनीपुर गांव में एक झोपड़ी में तमाम लोग बैठे थे। सभी आपस में चर्चा कर रहे थे कि गांव में उद्योग लगेगा तो क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। शुक्रवार को लोग बातचीत करते दिखे, उनके पास जाकर क्षेत्र की स्थिति को समझने की कोशिश की गई। सभी ने अपने हिसाब से विचारों को प्रकट किया।
झुलनीपुर गांव निवासी रामदेव गुप्ता, योगेंद्र पाल, गोविंद यादव आपस में हंसते हुए बोले कि ऐ भैया अब आए वाला दिन में कहूं इ नाहीं कहीं की झुलननीपुर में तस्करी होला, उद्याेग धंधा लगेगा तो क्षेत्र के लोग खुशहाल हैं। इन लोगों की बात को काटते हुए गोविंद ने कहा कि जमीन चिह्नित हो चुकी है। यह बात लोगों को जबसे पता चली है, वे अपनी जमीनों का भाव बढ़ाने लगे हैं। सभी इस उम्मीद में हैं कि उद्योग लगेंगे तो काम धंधा मिलेगा। सीलिंग वाली भूमि के भाव भी बढ़ जाएंगे। नबीहसन ने कहा कि जब विकास होता है तो कुछ नुकसान भी पहुंचता है। सीमा से सटे होने के कारण यहां उद्योग लगाना बेहद जरूरी था। आसपास के कई गांवों के लोगों को फायदा होगा। महेश, नाथू, अवधेश ने कहा कि सीलिंग की जमीन कृषि योग्य भूमि है। इस पर पिछले कई वर्षों से खेती की जाती है। जिस पर अच्छी फसल उगती है। आने वाले दिनों में खेती बाड़ी की जगह पर उद्योग धंधे लगेंगे।
चर्चा के दौरान तब नकारात्मक बातों का दौैर शुरू हुआ तो सभी उठकर चले गए।
दिल्ली और मुंबई नहीं जाएंगे क्षेत्र के युवक
झुलनीपुर व आसपास गांव के युवाओं को रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई नहीं जाना पड़ेगा। गांव में ही उनको रोजगार के अवसर मिलेंगे। दुकानों के जरिये काम धंधा बढ़ेगा। अगर कोई युवा बाहर नहीं जाना चाहेगा तो उसे गांव में सुविधा मिल जाएगी। औद्योगिक हब बनने से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद ही लोगों के रहन सहन में बदलाव आएगा। झुलनीपुर के गंगा प्रसाद ने बताया कि बीते चार साल से दिल्ली में रहकर काम करता हूं। गांव के पास में उद्योग लग जाएगा तो बाहर नहीं जाना पडे़गा। परिवार के साथ रहकर काम करने के लिए मिलेगा। वर्तमान समय में जमीन की कीमत 40 से 60 लाख रुपये प्रति एकड़ है।
किसी क्षेत्र में अगर उद्योग धंधे लगते हैं तो उस क्षेत्र में सामाजिक बदलाव तेजी से आता है। लोगों की जीवन शैली भी बदल जाती है। जब आर्थिक आमदनी बढ़ती है तो व्यक्ति के रहन-सहन का स्तर बढ़ने लगता है। जिले में उद्योग धंधाें के जरिये विकास को गति देने की कोशिश निश्चित रूप से आने वाले दिनों में सफल होगी।
-डॉ. देवेंद्र कुमार पाठक, समाज शास्त्री, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज, महराजगंज
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नौ अगस्त को अधिकारी कर चुके हैं सर्वे
झुलनीपुर में वृहद औद्योगिक आस्थान के निर्माण के लिए 39 एकड़ भूमि को उपलब्ध होने के बाद राज्य औद्योगिक निगम के अधिकारियों पिछले माह नौ अगस्त को भूमि देखी थी। निगम के अधिकारियों की पहल पर अवर अभियंता अविनाश चंद्र व टेक कृति सर्वेइंग कंपनी के सर्वेयर सुरेश द्विवेदी ने मंगलवार को झुलनीपुर में पहुंचकर भूमि की स्थिति को देखा एवं रिपोर्ट तैयार अधिकारियों को भेजा।
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600 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा
वृहद औद्योगिक आस्थान के लिए सीलिंग की 25 एकड़ भूमि चिह्नित है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक निगम ने इस पर आस्थान निर्माण की स्वीकृति दे दी है। यहां फोर्टिफाइड चावल, प्लास्टिक कुर्सी, एल्युमिनियम रिंग समेत कई उद्योग विकसित होंगे। इनमें 71 करोड़ रुपये का निवेश होगा। 600 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। निवेश के लिए 28 लोगों ने भूमि मांगा है।
आने वाले दिनों में सब कुछ ठीक रहा तो सब कुछ बदला नजर जाएगा। सबसे राहत की बात है कि लंबे अरसे बाद इस पिछडे़ क्षेत्र के विकास की बात की गई है।
-रामदेव, नागरिक
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गुजरे वक्त में कोई जमीन इधर खरीदने नहीं आता था, लेकिन जबसे औद्योगिक क्षेत्र बनने की बात चर्चा में आई है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर से लोग जमीन का भाव पूछने आते हैं।
-योगेंद्र नागरिक