विसर्जन स्थलों पर पूजन सामग्री बिखरे, घाट के किनारे जरूरी सामानों का एकत्र कर रहे थे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गुजरे वक्त में मां दुर्गा की प्रतिमा की बेकद्री हुई, अब मां लक्ष्मी व गणेश प्रतिमा की घाटों पर बेकद्री, उनके पोशाक और आभूषण की लूट, पैरों तले पूजन सामग्रियों की तस्वीरों ने नजर आईं। जिले में तमाम घाट प्रतिमा विसर्जन के लिए बने स्थानों पर कुछ ऐसा नजारा दिखा। चढ़ावे की रकम के लिए मारपीट से भी परहेज नहीं किया जा रहा था। जमकर नाचने गाने के बाद नदियों के तट पर प्रतिमाओं को गिराना और उसके बाद कीमती सामान को लेकर मची नोच-खसोट को लेकर श्रद्धालुओं के बीच चर्चाएं होती रही।
पनियरा क्षेत्र में भौराबारी घाट से जो तस्वीरें दिखी, उसे लेकर हर कोई सोचने को विवश हो गया। मंगलवार की दोपहर घाट के किनारे कुछ बच्चों के साथ बड़ी उम्र के लोग नजर आए। प्रतिमाओं से साड़ी, गहने, लकड़ी सहित अन्य सामान निकालने की होड़ मची थी। सभी घाट के किनारे जरूरी सामानों का एकत्र कर रहे थे। प्रतिमा विसर्जन के साथ घड़े, जेवर, रुपये आदि को खोजा जा रहा था। इस बीच एक बच्चे तो 10-10 के दो सिक्के मिल गए। इसे लेकर दोनों नोकझोंक करने लगे। बांस फठ्ठियों को एकत्र किया जा रहा था।
इंद्रेश ने बताया कि बांस झोपड़ी बनाने के काम आएगा। इस वजह से इसे एकत्र कर घर ले जा रहा हूं। काफी देर तक घाट के किनारे इस तरह की तस्वीर दिखी। सभी अपनी जरूरत के अनुसार सामान ढूंढने में जुटे रहे। त्रिमुहानी घाट पर ऐसा ही नजरा दिखा। यहां भी प्रतिमाओं की बेकद्री दिखी।
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सारा सामान कूड़े की तरह फैला दिया गया
मां लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं के संग लोग पूजन सामग्री, देवी-देवताओं की मूर्तियां और धार्मिक पुस्तकें ले जा रहे हैं। विसर्जन के बाद प्रतिमा के साथ सारे सामानों को कूड़े की तरह फैला दिया गया था और उन्हें अब पैरों से रौंदा जा रहा था।
प्रतिमा खंडित होना शुभ नहीं माना जाता
पंडित दिवाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्रीय विधि के अनुसार मूर्ति, पंच महाभूतों से बनी होती है। इसलिए इसे पंच महाभूतों में विलीन कर देना ही मूर्ति विसर्जन कहलाता है। शास्त्रों में इसकी प्रक्रिया है। प्रतिमा चाहें दुर्गा की हो या गणेश की। उसे पानी में लेकर उतरते हैं। फिर धीरे-धीरे जल में अर्पित कर देते हैं। विसर्जन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मूर्ति खंडित न हो। प्रतिमा खंडित होना शुभ नहीं माना जाता है।
विसर्जन के दौरान हमें यह ध्यान रखना होगा कि मां लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा से जुड़ी हुई सामग्री इधर-उधर न फेंके। इसे भी आस्था और सम्मान के साथ उचित स्थान पर विसर्जित करें। आस्था का पूरी तरह से सम्मान करना चाहिए। समाज में प्रत्येक व्यक्ति को इस पर विचार करना होगा।
डॉ. अजय कुमार मिश्र, प्राचार्य, जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज, महराजगंज
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विसर्जन के लिए जैसी तैयारी होनी चाहिए वह नहीं होती है। आधी-अधूरी तैयारी की वजह से ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। यह गंभीर विषय है, इस दिशा में सभी को विचार करने की जरूरत है। जिस आस्था से पूजा-पाठ करते हैं, उसी आस्था से देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी करना चाहिए।
डॉ. राणा प्रताप तिवारी, हिंदी विभागाध्यक्ष
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