महराजगंज। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कृषि के लिए हानिकारक हो रहा है। हाइब्रिड बीजों एवं अधिकाधिक भूजल दोहन से भूमि की उर्वरा शक्ति, उत्पादन, भूजल स्तर और मानव स्वास्थ्य में निरंतर कमी आ रही है।
किसान खेती की बढ़ती लागत और बाजार पर पूरी तरह निर्भरता के चलते घाटे के कारण खेती छोड़ रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग एक से 14 अगस्त तक गांव-गांव किसानों को जागरूक कर जैविक खेती की योजना बना रहा है।
जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने कहा कि जैविक अथवा प्राकृतिक खेती से जुड़ने वाले किसानों को 15 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से किसानों की आय दोगुनी होती है। इसमें रासायनिक उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है।
देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, नीम खली, बेसन, पानी व विभिन्न पेड़-पौधों की पत्तियों का उपयोग कर बीजामृत, जीवामृत घनजीवामृत, दशपर्णी अर्क व नीमास्त्र के माध्यम से खेती की जाती है। इसका प्रशिक्षण भी किसानों को दिया जाता है। इस बार केंद्रीय बजट में भी किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए विशेष प्राविधान किए गए हैं।
इसको देखते हुए जिले के किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती से जोड़ने के लिए विभाग 14 दिन का किसान संपर्क अभियान प्रारंभ करेगा, जो भी किसान इसके इच्छुक पंजीकृत होंगे उन्हें 15 अगस्त को सम्मानित करने तथा प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था कराई जाएगी।