इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक 59 लोगों की दुर्घटनाओं में हो चुकी है मौत, कट चौड़े होने के कारण तेजी से गुजरते हैं वाहन, दुर्घटना का खतरा ज्यादा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे महराजगंज की सड़कों पर रफ्तार बढ़ी तो दुर्घटनाओं में भी इजाफा होने लगा। सुरक्षा का इंतजाम न होने के कारण हादसे का खतरा ज्यादा रहता है। शहर से गुजर रहे हाईवे पर खतरा ज्यादा है। चौड़े कट से होकर वाहन तेजी से गुजरते हैं। बीच बीच में अन्य कट भी बने हैं, जहां से बाइक, साइकिल आदि निकल जाती हैं। हादसे को बढ़ावा देने वाले कट की पड़ताल में सुरक्षा को लेकर कहीं भी संकेतक लगे नहीं दिखे।
शुक्रवार को शहर में बैकुंठपुर पाॅवर हाउस से आगे बढ़ते हुए सक्सेना चौक पर पहुंचा। इस बीच चौड़ी सड़क से होकर वाहन फार्राटा भर रहे थे। हनुमानगढ़ी पर पड़री रोड की ओर से तेज रफ्तार कार सड़क पर पहुंची। गोरखपुर की ओर से रोडवेज बस आ रही थी। कार अचानक हाईवे पर चढ़ी तो बस चालक ने अचानक ब्रेक लगा दी। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। चालक की सूझबूझ से हादसा टल गया।
हाईवे पर इस तरह से मामले अक्सर दिख जाते हैं। हाईवे पर जहां भी कट हैं, वहां चौड़े बने हैं। हनुमानगढ़ी से आगे बढ़ते सक्सेना चौक से दाहिनी तरफ की सड़क निचलौल जाती है। एनएच-730 फरेंदा की ओर से शहर से होकर जा रहा है। सक्सेना चौक से आगे बढ़ने पर इस हाईवे पर जगह- जगह कट बने हैं। तेज गुजर रहे वाहनों की गति कभी तेज तो कभी धीमी होते दिखी।
हाईवे पर ही जिला उद्योग चौराहे से आगे बढ़ने पर कई स्थानों पर कट दिखे। करीब 12 से अधिक स्थानों पर कट दिखे, जहां से लोग अचानक बाइक या कार लेकर हाईवे पर चढ़ जा रहे थे। तेज गति से आ रहे वाहनों से शहर में दुर्घटना की आशंका प्रबल हो गई है। रात में तो अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। वाहन की रफ्तार बढ़ी, लेकिन सुरक्षात्मक कार्यों पर विशेष जोर नहीं दिया गया।
गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी खतरा कम नहीं
गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित फरेंदा कस्बे से सात किलोमीटर उत्तर की दिशा में भैया फरेंदा चौराहे पर राजमार्ग पर बना कट दुर्घटना को बढ़ावा दे रहा है। इस मार्ग से करीब दस ग्राम सभाओं के लोगों के आने-जाने का मुख्य मार्ग है। राजमार्ग पर कट होने से दुर्घटना की आशंकाएं बनी रहती हैं। क्षेत्र के राकेश ने बताया कि कट चौड़ा होने के कारण वाहन तेजी से गुजरते हैं। यहां दुर्घटनाओं की आशंका ज्यादा रहती है।
सैनिक ग्राम उदितपुर के सामने कट खतरनाक
गोरखपुर सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैनिक गांव भैया फरेंदा के सामने बना कट खतरनाक है। फरेंदा कस्बे से आठ किलोमीटर उत्तर दिशा में आगे बढ़ने पर यह कट आपको मिलेगा। इस कट से भी अधिक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। महेश अग्रहरि ने बताया कि हाईवे पर कट तो बने हैं, लेकिन सुरक्षा के उपाय ज्यादातर स्थानों पर नहीं हैं। यही कारण है कि दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
सबसे ज्यादा खतरनाक धनेवा मोड़
जिले की सड़कों के ब्लैक स्पाॅट जानलेवा साबित हो रहे हैं। फरेंदा राष्ट्रीय राजमार्ग समेत विभिन्न सड़कों पर कुल 28 ब्लैक स्पाॅट हैं। सड़कों में तकनीकी खामियां, तेज रफ्तार लगातार हादसों की संख्या को बढ़ रहे हैं। नियम से चलने वाले भी ब्लैक स्पाॅट पर उचित संसाधन और संकेतक नहीं होने के कारण दुर्घटना के शिकार होते हैं। सर्वाधिक दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्ग पर होती हैं। करीब छह स्थान ऐसे हैं, जहां प्रतिदिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। सबसे ज्यादा खतरनाक जिला मुख्यालय मोड़ व धनेवा मोड़ है। सिदुरिया, सेमरा चंद्रौली के पास टी प्वाइंट बेहद खतरनाक है।
जिले में यहां चिह्नित हुए हैं ब्लैक स्पाॅट
थाना कोतवाली क्षेत्र में भिटौली, सिदुरिया, बैकुंठपुर, शिकारपुर, महुअवा ढाला, धनेवा-धनेई व रमपुरवा, घुघली थानाक्षेत्र में घुघली कस्बा, थाना सोनौली में कस्बा सोनौली, नवडिहवा, निचलौल थानाक्षेत्र में ओड़वलिया, व कोठीभार थानाक्षेत्र में कस्बा कोठीभार, सबया व बंदी ढाला, श्यामदेउरवा थानाक्षेत्र में परतावाल बाजार, सेमरा चंद्रौली, छपिया, फरेंदा थानाक्षेत्र में धानी ढाला, बाजार डीह, महदेवा, दक्षिणी बाईपास, पुरंदरपुर क्षेत्र में कस्बा पुरंदरपुर, बृजमनगंज में धानी ढाला, थाना कोल्हुई में कोल्हुई बाजार, एकसड़वा, थाना नौतनवा में कस्बा नौतनवा, छपवा व मुड़िला, अत्यधिक दुर्घटनाओं के लिए चिह्नित हैं।
वर्ष - सड़क हादसे - घायल- मृत्यु
2020- 353 179 - 206
2021- 408- 241- 217
2022-604-316285
2023मार्च-13374-59
वर्ष 2022 में सबसे अधिक मौतें मई में हुईं
वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटना में सबसे अधिक मौतें मई में हुईं। मई में 33 लोगों की मौत हुई, जबकि 44 लोग घायल हुए। जनवरी में 18 मौत, 22 घायल, फरवरी में 13 मौत, 14 घायल, मार्च में 24 मौत, 15 घायल, अप्रैल में 24 मौत, 23 घायल, जून में 28 मौत, 30 घायल, जुलाई में 24 मौत, 28 घायल, अगस्त में 20 की मौत, 33 घायल, सितंबर में 21 मौत, 22 घायल, अक्तूबर में 23 मौत, 23 घायल, नवंबर में 32 मौत, 32 घायल और दिसंबर में 25 लोगों की मौत, 30 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2022 में 604 सड़क दुर्घटनाएं हुई, इसमें 285 लोगों की मौत हो गई, जबकि 316 लोग घायल हुए थे।
कोट
समय-समय पर वाहनों की जांच की जाती है। ओवरस्पीड होने पर वाहनों को चालान कर दिया जाता है। यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जाता है। सुरक्षित यात्रा के लिए विभाग की ओर से हर संभव कोशिश की जा रही है।
-आरसी भारतीय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
कोट
सड़क सुरक्षा के प्रति हमेशा लोगों को सचेत किया जाता है। रैली, गोष्ठी के अलावा अभियान चलाकर वाहन चालकों को नियमों के बारे में जानकारी दी जाती है। दुर्घटनाओं में कभी लाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। ब्लैक स्पाॅट पर भी सुरक्षात्मक उपाय हुए हैं।
-गुलाब यादव, यातायात निरीक्षक