फरेंदा। भगवान शिव और पार्वती का विवाह धूमधाम से हुआ, जिसमें पार्वती के तरफ से सारे उच्च कुलों के राजा महाराजा व शाही रिश्तेदार पहुंचे थे। वहीं, भगवान शिव की तरफ से कोई रिश्तेदार नही था। बारात में सभी प्रकार के प्राणी पहुंचे थे। जिससे देखकर उपस्थित लोग दंग रह गए।
ये बातें कथावाचक धीरज कृष्ण उपाध्याय ने श्रीराम कथा के दूसरे दिन कहीं। कथावाचक ने कहा कि शिवजी के गण श्रृंगार करने में लगे हुए। जटाओं का मुकुट बना कर उस पर सांपों का मौर सजाया गया। शिवजी ने सांपों का ही कुंडल व कंगन पहने, शरीर व विभूति रमाई और वस्त्र की जगह बाघ का छाल लपेट कर बारात लेकर पहुंचे। जिसे देख लोग आश्चर्यचकित हो गए। शिवजी को इस रूप में देखने के लिए अनेक देवी देवता पहुंचे थे। शिव विवाह का कथा सुनकर भक्त भक्तिभाव में डूबे रहे। इस दौरान यजमान परमात्मा अग्रहरि, संजय टिबड़ेवाल, विनोद चोखानी, गोकुल अग्रहरि, गौतम पटवा, जगदंबा उपाध्याय, देवीशरन दूबे आदि मौजूद रहे।