महराजगंज। 12 वर्ष पहले हत्या कर साक्ष्य छिपाने के मामले में कोर्ट ने पति समेत छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की आधी धनराशि मृतका के पुत्र को देने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया।
पनियरा थाना क्षेत्र के डिंगुरी टोला शीतलापुर निवासी रामदवन यादव ने 10 जून 2004 को स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि वह अपनी पुत्री फूलझारी की शादी उसी थाना क्षेत्र के बसडीला निवासी बनवारी से की थी। उसका गवना 1995 में हुआ था। उनके दामाद बनवारी का संबंध उसकी भाभी शोभावती से था। इस बात को लेकर लालझारी व उसके पति से अक्सर विवाद होता था। 10 जून 2004 की सुबह सूचना मिली कि उसकी पुत्री की हत्या उसके पति बनवारी यादव, पारसनाथ यादव, बुद्धू, सिद्धू, रामलाल, शोभावती ने लाठी डंडे से मारकर कर दी है। साक्ष्य छिपाने के लिए शव को जला दिया गया है।
इस मामले में सहायक शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार त्रिपाठी ने 17 गवाहों को पेश किया। अपर सत्र न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्ता ने सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और बीस बीस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड का आधा हिस्सा मृतका के पुत्र को देने का आदेश कोर्ट ने दिया।