जिस गाय के लिए मां-बेटे ने जान गंवाई..उसने चारा खाना छोड़ा
अमवा भैंसी गांव में समाचारपत्र पढ़कर लोग घटना के बारे में कर रहे थे चर्चा, झुलसी गाय दरवाजे पर बंधी थी, डॉक्टर कर रहे इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भिटौली थाना क्षेत्र के अमवा भैंसी गांव में शुक्रवार को सन्नाटा पसरा हुआ था। गांव की गलियां सूनी पड़ी थीं। कौशल्या और रामाशीष के घर का दरवाजा बंद था। आसपास के लोग घटना पर दुख प्रकट करते हुए समाचारपत्र पढ़कर आपस में चर्चा कर रहे थे। खेती-बाड़ी का समय होने के कारण ज्यादातर लोग खेत चले गए थे। उधर, जिस गाय को बचाने के लिए लिए मां-बेटे ने जान गंवाई, उसने चारा खाना छोड़ दिया है।
शुक्रवार सुबह 11 बजे, अमवा भैंसी गांव में गलियां सूनी दिखीं। उत्तर तरफ मुड़ने पर आरसीसी सड़क से आगे बढ़ने पर पेड़ की छाया में कुछ लोग बैठकर चर्चा कर रहे थे। अमर उजाला समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों को पढ़ रहे थे। पास में बैठे सहदेव बोले कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। इस घटना को मरते दम तक नहीं भुला पाएंगे। आग का यह खौफनाक मंजर कभी नहीं भूलेगा। यह दर्द आजीवन सालता रहेगा।
अभी यह बोल ही रहे थे कि जयराम ने कहा कि घटना देखकर रूह कांप गई। जिंदा जलकर मां-बेटे ने दम तोड़ दिया। अभिमन्यु ने कहा कि पोखरी भी सूखी थी। उसमें पानी रहता तो शायद आग जल्द बुझ गई होती। गोधन बोले कि सब कुछ ईश्वर में हाथ में है। क्या किया जा सकता है। हर घटना का समय निश्चित है। होनी को कौन टाल सकता है।
इन लोगों की चर्चा सुनने के बाद आगे बढ़ने पर करीब 20 कदम की दूरी पर रामाशीष का ई-रिक्शा पड़ा हुआ था। थोड़ी दूरी पर वह गाय दिखी, जिसके लिए मां-बेटे ने दम तोड़ दिया। गाय झुलसी हुई है। उसका इलाज हो रहा है। रामाशीष के घर का दरवाजा बंद था। अंदर उनकी पत्नी और बच्चे थे।
रामाशीष के बड़े पिता चंद्रभान दरवाजे के सामने मिले। वह फफक रहे थे। पास में जामवंत, सदानंद, संचित उनका ढांढस बंधा रहे थे। आगे बढ़ने पर लोग अपने-अपने खेतों में काम करते हुए दिखे।
दुख-दर्द बांटने पहुंचे रिश्तेदार
नौतनवां। थाना क्षेत्र के गांव खरग बरवा में झोपड़ी में आग लगने से दो बच्चों की हुई मौत के बाद से ही गांव में मातम है। सुबह करीब 11 बजे घटनास्थल पर नेबूलाल, सोनमती, रेनू, लालमती, विक्रम गमगीन मिले। लोगों ने बताया कि हम सभी रिश्तेदार हैं। सूचना पाकर मौके पर आए हैं। दुख-दर्द बांटने रिश्तेदार पहुंचे। सभी को रो-रो कर बुरा हाल था।
घटनास्थल से लगभग तीन सौ मीटर दूरी पर एक पोखरी है। आग लगने पर घटनास्थल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित रामबहाल का पंपिंगसेट चालू कर आग बुझाई गई थी। घटनास्थल पर बगल में एक निजी हैंडपंप खराब पड़ा था। पीड़ित के घर पर रिश्तेदारों की भीड़ जुटी हुई थी।
मृत बच्चों की मां सरिता, दादी कमलावती दहाड़ें मारकर रो रही थीं। अन्य लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। मृत बच्चों के पिता गौतम साढ़े ग्यारह बजे घर पर पहुंचे तो उन्होंने बताया कि थाने पर कागजी कार्रवाई के लिए पुलिस बुलाई थी।
पीड़ित के घर के साथ पड़ोस में भी नहीं जला चूल्हा
खरगबरवा गांव में घटना के बाद पूरे गांव में मातम है। पीड़ित के साथ ही पड़ोसियों के घर भी चूल्हे नहीं जले। पड़ोसी राजकुमारी, हरिकेश, चंद्रावती, शिवदास, महेंद्र आदि ने बताया कि शाम को भोजन नहीं बना और पूरी रात नींद नहीं आई।
ग्राम प्रधान ने की आर्थिक मदद
घटनास्थल पर शुक्रवार को ग्राम प्रधान राजकुमार सिंह मिले। वहां लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। ग्राम प्रधान ने निजी व्यवस्था से पीड़ित को 5000 रुपये नकद के साथ राशन दिया। ग्राम प्रधान के अलावा किसी ने राहत सामग्री नहीं दी। गांव में कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इसका मलाल लोगों को है।