निचलौल। क्षेत्र के ईंट भट्ठों के संचालन में नियमों की जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है। कहीं बीच आबादी में चिमनियां धुआं उगल रही हैं, तो कहीं जंगलों के नजदीक भट्ठियां जल रही हैं। प्रदूषण से निपटने के इंतजाम नदारद होने के साथ कइयों का पंजीयन भी नहीं है। वहीं, कर न जमा करने के साथ ही मजदूरों की सुरक्षा और उनके हितों पर भी डाका डाला जा रहा है। लेकिन विभाग के जिम्मेदार इस सभी कारनामें से अंजान बने हुए है।
जानकारी के मुताबिक आधिकारिक तौर पर जिले में करीब ढाई सौ ईट भट्ठे चल रहे हैं। लेकिन गैरकानूनी तरीके से चलने वाले भट्ठों को इसमें जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 400 के पार पहुंच जाएगी। हालांकि ईंट-भट्ठा चलाने के लिए जिला पंचायत, श्रम विभाग, प्रदूषण व खनन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। इतना ही नहीं निर्धारित समयांतराल पर इनका नवीनीकरण कराना भी पड़ता है। नियम के मुताबिक आबादी और जंगलों के आसपास कोई भी ईंट-भट्ठा नहीं खोला जा सकता, न ही यहां मिट्टी डंप की जा सकती है। ईंट की पथाई पर भी पूरी तरह रोक है। लेकिन कई भट्ठे इन नियम-कायदों को दरकिनार दिन-रात आसमान काला कर रहे हैं।
क्षेत्र के ठूठीबारी मार्ग स्थित ओडवलिया गांव से महज कुछ ही दूरी पर उत्तर,पश्चिम और दक्षिण तरफ तीन ईट भट्ठा खोल दिया गया है। जहां पर कोयले और लकड़ी की जगह शुगर मिल की भूसी का डंप किया गया है। इसी तरह मेघौली गांव में आबादी के बेहद नजदीक ईट भट्ठा चल रहा है। ऐसे ही कुछ नजारा निचलौल वन रेंज क्षेत्र के पतौना जंगल से सटे महज 100 मीटर की दूरी पर चल रहे ईट भट्ठे और करमहिया गांव और जंगल के बीचों बीच संचालित ईट भट्ठों की है। यहां के ज्यादातर भट्ठे आबादी से 100-150 दूर पर ही खुले हैं। वहीं निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि जंगल से पांच सौ मीटर के दायरे में ईंट-भट्ठे का संचालन नहीं किया जा सकता। मिट्टी भी डंप नहीं की जा सकती है।
अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत रमेश सिंह ने बताया कि ईट भट्ठों को संचालित करने के लिए प्रदूषण और खनन विभाग सहमति पत्र देती है। उसकी के आधार पर विभाग की ओर लाइसेंस दिया जाता है। अगर उनकी ओर से सहमति पत्र जारी नहीं किया जाएगा, तो लाइसेंस पर भी रोक लगा दिया जाएगा।
गैर प्रांतों से आने वाले मजदूरों का नहीं है लेखाजोखा
क्षेत्र के रहने वाले मनोज,कमलेश गुप्ता,सुग्रीव सैनी आदि ने कहा कि भट्ठों पर नाबालिगों से कार्य कराया जाता है। लेकिन श्रम विभाग इसकी जांच नहीं करता है। अधिकतर भट्ठा संचालकों के पास श्रमिकों का लेखाजोखा भी नहीं है। कोई घटना होने पर मालिक और विभाग पल्ला झाड़ लेते हैं। वही श्रम प्रवर्तन विभाग के जिम्मेदारों के मुताबिक दूसरे प्रदेश से आने वाले मजूदरों को ठेकेदार लाते हैं। भट्ठा मालिक मजदूरों की सूचना भी नहीं देते हैं। बीच-बीच में इसकी जांच कर कार्रवाई भी की जाती है।
मिट्टी खनन में नहीं जमा कर रहे रायल्टी शुल्क
जानकारी के मुताबिक रायल्टी शुल्क समाप्त होने के बाद शुल्क जमा करना पड़ता है। लेकिन भट्टा संचालकों की ओर से कम शुल्क जमाकर अधिक मिट्टी का खनन कर लिया जाता है। इतना ही धूल-मिट्टी उड़ाते हुए ग्रामीणों के घरों के बीच में डंप किया जा रहा है। खनन अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि शुल्क न जमा करने वाले ईंट भट्ठों का संचालन बंद कराया जाएगा। मिट्टी खनन की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।