फरेंदा। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में फेल होने पर एक छात्र ने मंगलवार को कमरा बंदकर जहर खाकर जान दे दी। घटना के बाद परिवार के लोग सदमे में हैं।
फरेंदा थाना क्षेत्र के मथुरानगर टोला, ढोढ़ापुर निवासी रामचंद्र का 18 वर्षीय पुत्र ध्रुव चौधरी लाल बहादुर शास्त्री इंटर काॅलेज का छात्र था। उसने विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। मंगलवार को परीक्षा परिणाम आया तो वह फेल हो गया। इससे सदमे में आकर उसने दिन में करीब तीन बजे खुद को कमरे में बंद कर लिया और दूध में सल्फास की पांच गोलियां मिलाकर पी ली। जब कुछ देर बाद तक दरवाजा नहीं खोला तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। काफी मशक्कत के बाद छात्र ने दरवाजा खोला। तब तक उसकी हालत बिगड़ चुकी थी।
उसने परिजनों को जहर खाने की बात बताई। परिजन आनन-फानन इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी ले गए। जहां डाॅक्टर ने हालत गंभीर देखते हुए मेडिकल काॅलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया। रात करीब नौ बजे छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना की सूचना छात्र के गांव पहुंची तो मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
छात्र की मौत से परिजनों के साथ दोस्त भी सदमे में
डॉक्टर बनना चाहता था ध्रुव, फेल होने की बात सुनकर लगा गहरा धक्का
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। फरेंदा थाना क्षेत्र के मथुरानगर टोला ढोढ़ापुर ध्रुव चौधरी डॉक्टर बनना चाहते थे। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नीट की तैयारी करने की योजना थी, लेकिन बोर्ड परीक्षा का परिणाम आया तो ध्रुव के मन दुखी हो गया, इससे आहत होकर उन्होंने मौत को गले लगा लिया। उनकी मौत ने परिजन ही नहीं दोस्तों को भी गम के समंदर में डुबो दिया।
मृत छात्र के दोस्त संदीप कहते हैं कि मिलता था तो हमेशा हंसकर बात करता था। वह कहता था कि आगे की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाएगी। भाई बाहर काम करते हैं। पिता जी किसी तरह से पढ़ा रहे हैं। उनका नाम रोशन करना है। उसकी बातों को याद करते हुए संदीप फफक पड़े। उसकी एक-एक बातें कहते हुए संदीप का गला रुंध जा रहा था। दोस्तों ने कहा कि साथ में स्कूल जाते थे। ध्रुव साइकिल से स्कूल आता था तो गेट पर मिलते ही हालचाल पूछता था। विषय के बारे में भी कुछ समस्या होती थी तो आपस में बातचीत कर प्रश्न को हल करता था। अगर कभी रूठता था तो पल भर में मान भी जाता था। वह ज्यादा देर तक दोस्तों से नाराज होकर नहीं रहता था। घर में भी सबका दुलारा था।
छात्र के पिता रामचंद्र कहते हैं कि बेटे की हर जरूरत को पूरा करता था। उसने पता नहीं कैसे यह कदम उठा लिया। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। बेटे को याद करते हुए वह सिसकने लगे। आसपास के लोग उनको ढांढस बंधा रहे थे। ध्रुव शुरू से मन लगाकर पढ़ता था। कभी कभार घर पर उसे डांट पड़ती थी तो सिर झुकाकर बातें सुनता था। बहुत ही मासूमियत से माफी मांग कर चला जाता था। उसकी यादों को सहेजे हुए परिजन समेत दोस्त सभी गमगीन हैं।
रोते-रोते बेहोश हो जा रहीं मां गीता
फरेंदा। छोटे बेटे ध्रुव चौधरी के जहर खाने से मौत की सूचना मां को मिली तो परिवार पर वज्रपात हो गया। माता-पिता दहाड़ें मार कर रोते-रोते बेसुध हो रहे थे। पड़ोस की महिलाएं उनको ढांढस बंधा रहीं थीं। मां गीता रो-रो कर बेहोश हो जा रहीं थीं। उनके कलेजे का टुकड़ा इस दुनिया में नहीं रहा, इसका विश्वास नहीं हो रहा था। पिता रामचंद्र बेसुध हो कर लोगों को निहार रहे थे। ध्रुव दो भाइयों में छोटा था। बड़े भाई प्रमोद रोजगार के सिलसिले में गुजरात के सूरत में रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही वह वहां से घर के लिए निकल पड़े। छात्र की तीन बहनें रंभा, संभा व लक्ष्मी का भी रो-रो कर बुरा हाल है। युवक के शव का पोस्टमार्टम पंचनामा के बाद मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ही हुआ। प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र कुमार राय ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। जानकारी की जा रही है। भौतिकवादी सोच के कारण आपा खो रहे युवा
आलोचनाओं के डर से छात्र खुदकुशी कर रहे हैं। व्यक्तिवादी व भौतिकवादी सोच के कारण युवाओं के भीतर कुंठा की भावना जागृत हो रही है। परिवार से दूर होकर सिर्फ सोशल मीडिया पर अपना समय गवां रहे हैं। उनको उचित अनुचित का अनुमान नहीं लग पा रहा है। परीक्षा में फेल होने के बाद परिवार, पड़ोसी व मित्रजन के दबाव व डर के कारण खुद को मौत को गले लगा रहे हैं। यह गलत है। उनको फेल होने के बाद निरंतर कठिन परिश्रम करना चाहिए। ताकि आगे चलकर अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हों। सकारात्मकता के साथ चलें। आगे बढ़ने पर पीछे की सभी असफलताएं भूल जाती हैं।
डॉ. मुकलेश्वरी गुप्ता, प्रवक्ता समाजशास्त्र, पीएसएम पीजी काॅलेज, फरेंदा
बच्चों पर नकारात्मकता न हावी हाेने दें
ऐसी घटनाओं का प्रमुख कारण नकारात्मकता है। बच्चों के अंदर परिजन सकारात्मक भाव जागृत करें। बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करें, जिससे वे अपनी समस्याओं का बेझिझक साझा कर सकें। आजकल भागदौड़ की जिंदगी में लोग बच्चों के साथ कम वक्त दे रहे हैं। यही कारण है कि इस तरह प्रवृत्ति पनप रही है। बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन दिखते ही मनोचिकित्सक से जरूरी परामर्श लें। उन्हें ये बताएं कि एक असफलता से डरना नहीं चाहिए। आगे की राह में आने वाली सफलताएं, पीछे की असफलताओं को खत्म कर देती हैं।
-डॉ. मेघा विश्वनाथ, मनोचिकित्सक, केएमसी डिजिटल अस्पताल
अकेलेपन से बच्चों को बचाएं
बच्चों की मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए होम्योपैथ औषधि का प्रयोग करें। चिड़चिड़ापन दूर करने में होम्योपैथ औषधि काफी मददगार होती है। जब कभी यह महसूस हो की बच्चा अकेलापन महसूस कर रहा है, तो उससे घुलमिलकर बातें करते हुए उसकी मनोदशा को जानने की कोशिश करें। यह सब विधि अपनाने से ऐसी घटनाओं पर विराम लगाने में सहायता मिलेगी।
-डॉ. देव चंद्र कुशवाहा, वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक
फास्ट फूड डाल रहे नकारात्मक प्रभाव
डॉ. देवचंद्र कुशवाहा के अनुसार, छात्रों पर डेड फ़ूड जैसे मोमो, चाऊमीन, बर्गर, मंचूरियन आदि चाइनीज फ़ूड का प्रभाव शरीर पर नकारात्मक रूप से शरीर पर पड़ता है। वहीं यदि ताजा मौसमी फल व खाद्य लेने से सकारात्मकता आती है। हमें दैनिक जीवन में आए उलझनों से सामना करने में ताकत मिलती है। सात्विक आहार हमें स्वास्थ्य के अलावा ओजस को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। इस मौसम में तरबूज, पपीता, खीरा, ककड़ी, पना, बेल आदि का खूब सेवन करें।