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Maharajganj News: किसानों के साथ धोखा, फर्जी खाता खोलकर अनुदान राशि हड़पी

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एक बार भी फिर सुर्खियों में आया कृषि विभाग, कृषि विभाग में अनुदान राशि को फर्जी खाते में भेजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कभी कृषि यंत्रों में घोटाला तो कभी अनुदान राशि में गड़बड़झाला के चलते एक बार फिर से कृषि विभाग सुर्खियों में आ गया है। कृषि विभाग में अनुदान राशि को फर्जी खाते में भेज दी गई। फिर यह राशि गुपचुप तरीके से निकल भी गई। कागजी खानापूर्ति भी हो गई। मामला प्रकाश में आने के बाद से जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया है। कोतवाली पुलिस उप निदेशक कृषि की तहरीर पर दो आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच में जुटी है।
उप कृषि निदेशक रामशिष्ट ने बताया है कि डोमई निवासी अगया सदर तहसील ने कृषि अनुदान की धनराशि फर्जी खाते में भेजने के मामले में शासन में शिकायत की थी। इस मामले को शासन ने गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए सीडीओ और कोषाधिकारी को निर्देशित किया। जांच के बाद उन्होंने 24 जुलाई को आख्या सौंपी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि ग्राहक सेवा केंद्र संचालक रोहित कुमार मिश्रा निवासी मुंडेरा कला सदर कोतवाली तथा कृषि विभाग के तत्कालीन ब्लाॅक तकनीकी प्रबंधक किंकर सिंह निवासी खोखिया मुबारकपुर थाना अहिरौली बाजार जिला कुशीनगर की ओर से फर्जी खाता खोलकर अनुदान की धनराशि हजम कर ली गई है। मामले में कोतवाली पुलिस को प्रथम रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई। सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रवि कुरार राय ने बताया कि आरोपी रोहित कुमार मिश्रा और किंकर सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है।
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जांच हुई तो घोटाले के खुलेंगे कई राज
निचलौल क्षेत्र के जयश्री गांव निवासी किसान सत्येंद्र यादव, संजय पटेल, नागेंद्र, भुनेश्वर आदि ने कहा कि कृषि विभाग में सरकारी योजनाओं की धांधली का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी फर्जी बिल व जीएसटी नंबर पर कृषि यंत्रों पर अनुदान देने का भी मामला सामने आ चुका है। इसमें शासन के निर्देश पर जांच हुई थी। लेकिन वह जांच महज कागजों तक ही सीमित रह गई। इसके अलावा पीएम सम्मान निधि की रकम को भी कूटरचित ढंग से दूसरे खाते में मंगाने का भी आरोप सामने आ चुका है। ऐसे में अगर गहनता से जांच कराई जाए तो घोटाले के कई राज खुलकर सामने आएंगे।

कपड़े की दुकान पर हुई थी कृषि यंत्र की खरीदारी
कृषि विभाग में सब्सिडी घोटाला पहले भी सामने आ चुका है। कृषि उपनिदेशक कार्यालय पर आरोप लगा था। कि वर्ष 2018-19 और 2019-20 में कृषि यंत्रों की सब्सिडी फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भी जारी कर दी गई। जिस मामले की जांच कराई गई तो अनियमितता की उजागर हुई थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक कृषि यंत्र की खरीदारी में कपड़े की दुकान की रसीद लगाई गई थी।
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19 फर्मों को नोटिस देकर भूल गए जिम्मेदार
कृषि यंत्रों की सब्सिडी फर्जी बिल एवं जीएसटी नंबर पर भुगतान करने के मामले में जांच टीम ने 19 फर्मों को नोटिस जारी किया था। प्रशासन ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजा था। उसके बाद से जांच ठंडे बस्ते में कैद हो गई। आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई किसी को भनक तक नहीं लग पाई।
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