तीन बैंक खाते एक ही नंबर से थे लिंक, पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नौतनवा शहर में एक मोहल्ले के रहने वाले युवक से जालसाजों ने पहले मोबाइल में एनी डेस्क एप डाउनलोड कराया। फिर खाते से 9.33 लाख रुपये उड़ा दिए। इस मामले में पीड़ित युवक ने पुलिस से शिकायत की। मामले में नौतनवा पुलिस बृहस्पतिवार रात को जालसाजों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच में जुट गई।
नौतनवा शहर के शास्त्री नगर मुहल्ले के रहने वाले साहिल वर्मा ने बताया कि 11 अगस्त को मीशो एप के माध्यम से 740 रुपये का लहंगा आर्डर किया था। जिसकी डिलेवरी 15 अगस्त को थी। इसी बीच आर्डर को चेक किया तो पता चला कि लहंगे की जगह साड़ी आ गई है। उन्होंने आर्डर को वह निरस्त कर दिया। आर्डर निरस्त करने के दो दिन बाद मोबाइल पर फोन आया, कि आर्डर धनराशि प्राप्त करने के लिए सहमति दें। जिस पर वह अपनी सहमति दी, लेकिन कुछ समय बाद भी आर्डर की धनराशि वापस नहीं मिली। इसी बीच मोबाइल पर फोन आया कि आपके व्हाट्सएप पर एनी डेस्क एप का लिंक भेजा गया है। जिसे डाउनलोड कर लें ताकि आपकी आर्डर की धनराशि मिल सके।
एनी डेस्क एप डाउनलोड करने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया। वहीं 6 सितंबर को उसी मोबाइल नंबर से फिर फोन आया कि एनी डेस्क एप को फिर से इंस्टाल कर सहमति दें। उसके बाद उन्होंने एप को दोबारा इंस्टाल कर सहमति दे दी। जिसके बाद 6 सितंबर रात करीब 11 से 12 बजे के बीच एक बैंक खाते से 5,00,011 रुपये और 3,26,011 रुपये तथा दूसरे बैंक खाते से 1,000,12 रुपये जबकि तीसरे बैंक खाते से 7005 रुपये की निकासी कर ली गई। तीनों बैंक खाते में एक ही मोबाइल नंबर लिंक था। ऐसे में उनके तीनों बैंक खातों से कुल 9,33,042 रुपये की निकासी कर ठगी कर ली गई है।
नौतनवा थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार राय ने कहा कि मामले में पीड़ित की शिकायत पर छादीम लक्षकर निवासी कोलकाता दक्षिणी पूर्वी प्रभाग, पश्चिम बंगाल के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
मीशो एप पर लहंगा का किया था आर्डर आ गई साड़ी
पीड़ित युवक ने जालसाजों के चंगुल में फंस मोटी रकम गंवाने के बाद बताया कि वह अक्सर जरूरत के सामानों की ऑनलाइन खरीदारी करते थे। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ था कि बुक ऑर्डर के जगह दूसरा सामान आ जाए। ऐसा पहली बार हुआ था कि मीशो एप पर लहंगा का आर्डर किया था, लेकिन साड़ी आ गई। लहंगा के आर्डर को बुक करते समय डिलेवरी रकम का भुगतान कर दिया था। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके साथ इतना बड़ा धोखा हो जाएगा।
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रिमोट कंट्रोल सॉफ्टवेयर एप्प है एनी डेस्क एप
कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर मोहम्मद आलम ने जानकारी देते हुए बताया कि एनी का मतलब कोई भी और डेस्क का मतलब डिवाइस से है। एनी डेस्क एप एक रिमोट कंट्रोल सॉफ्टवेयर एप्प है। जिसके जरिए आप एक मोबाइल डिवाइस को दूसरे मोबाइल डिवाइस से कनेक्ट करके एक्सेस कर सकते हैं। अर्थात एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल को चला सकते हैं। इसी का फायदा जालसाज उठाते हैं।
केस नंबर दो- 29 अगस्त को सिद्धार्थनगर वार्ड में महावीर ट्रेडर्स के संचालक मनोज कुमार जायसवाल के पास भी एसएसबी जवान बताकर फोन आया और ऑर्डर किए गए सामानों की सूची बनाकर मांगी। कहा गया कि बिल की रकम पाने के लिए इसका आधा पैसा भेजना होगा फिर ऑटोमेटिक उनके खाते में रकम ट्रांसफर हो जाएगी। इसके बाद मनोज ने तीन किस्तों में कुल 63000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।
केस नंबर -3- 31 अगस्त को महेंद्र नगर वार्ड में स्थित ठूठीबारी चौराहे के पास विनायक हार्डवेयर के संचालक राज जायसवाल के पास भी इसी तरह से एक फोन आया। 18560 रुपये के हार्डवेयर के सामानों की सूची भेज कर बिल बताया गया। झांसा देकर 10000 रुपये जालसाज ने ले लिया।