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Maharajganj News: नियमाें के पेच में फंसे कारोबारी, पर्यटक, प्रत्येक दिन बढ़ रही दुश्वारियां

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वाहनों के परमिट से लेकर बड़े भारतीय नोट के चलन पर रोक से हर कोई रोज होता परेशान, नियमों में बदलाव बन रहे परेशानी का कारण
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल में पिछले कुछ महीनों में बदलते नियमों के फेर में कारोबारी, पर्यटक से लेकर आम आदमी फंसते जा रहे हैं। इसका असर कारोबार, पर्यटन समेत अन्य क्षेत्रों पर भी दिखने लगा है। नियमों में उलझे कारोबारी समेत पर्यटकों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कभी मुद्रा बदलने में नुकसान उठाना पड़ता है तो कभी परमिट बनवाने के लिए पर्यटकों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। कारोबार का भी यही हाल है। पहले की तरह से नेपाल में भारतीयों का कारोबार नहीं हो रहा हैं।
जानकारी के अनुसार, चावल, चीनी, गेहूं पर प्रतिबंध के साथ ही भारत सरकार ने प्याज पर एक्सपोर्ट रेट निर्धारित कर दिया है। जबकि नेपाल सरकार ने 100 रुपये से अधिक के भारतीय नोट के चलन को बंद कर दिया है। हाल में नेपाल सरकार द्वारा गेंदा फूल के आयात को दिसंबर तक रोक दिया है, इससे भारतीय कारोबारियों को परेशानी हो रही है। वाहनों का परमिट शुल्क भी नेपाल ने बढ़ाया है। जबकि पुराने समय में यह सब कुछ नियम नहीं था। केले के कारोबार पर असर हुआ है। भारतीय केले को बगैर जांच रिपोर्ट के नेपाल में नहीं जाने दिया जाता है। इस तरह से अनेक नियमों के कारण हर किसी को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है।
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प्रतिबंध से मुरझाया भारतीय फूल का कारोबार, आर्डर निरस्त
महराजगंज। नेपाल ने भारतीय गेंदा के फूलों को मांगने पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल के कारोबारी के ऑर्डर निरस्त कर दिए हैं, इससे भारतीय कारोबारी मायूस हैं। कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। नेपाल में दीपावली पर भारतीय फूलों की मांग हर साल रहती है। नेपाल में बदल रहे नियम से कारोबारी समेत हर लोगों को मुश्किल हो रही है। हर साल सिर्फ दीपावली के दिन ही 15 से 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यह इस बार निरस्त हो गया है। नौतनवा के फूल कारोबारियों का कहना है कि बनारस में पूर्वांचल की सबसे बड़ी फूल मंडी से दीपावली और नेपाल के भाई-टिका, कुकुर पूजा को देखते हुए बुकिंग की गई थी। अब अचानक प्रतिबंध के बाद आर्डर कैंसिल किया जा रहा है। हर साल सिर्फ दीपावली के दिन ही 15 से 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता था।

नेपाल में 40 लाख मालाओं की खपत होने का अनुमान

नेपाल में इस साल के पर्व के दौरान 40 लाख मालाओं की खपत होने का अनुमान है। फूल व्यापारियों के प्रमुख संगठन, नेपाल फ्लोरीकल्चर एसोसिएशन के अनुसार, नेपाल में फूलों की खेती की लोकप्रियता के कारण, 80 प्रतिशत मांग नेपाली फूलों के उत्पादन से पूरी हो जाएगी। एसोसिएशन ने कहा कि पर्व शुरू होने में केवल एक सप्ताह बचे हैं, किसानों ने फूल चुनने और मालाएं बुनने की तैयारी शुरू कर दिए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष मिन बहादुर तमांग ने बताया, नेपाल इस साल के पर्व के लिए सयापात्री, मखमाली, गोदावरी जैसे फूल मालाओं में आत्मनिर्भर है।

थोक मंडी में फूलों की खरीदी धनतेरस से ही शुरू हो जाती थी। फिर नौतनवा और सोनौली में मंगवा कर नेपाल के कारोबारियों को दे दिया जाता था। इसका सीधा लाभ पूर्वांचल के किसानों को मिलता है। पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों से किसान बनारस के व्यापारियों से कारोबार करते हैं। प्रतिबंध लगने से काफी नुकसान हुआ है।

लक्ष्मण सैनी, नौतनवा, कारोबारी


बनारस के सैकड़ों गांवों में किसान फूलों की खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमाते हैं। यहां जिन फूलों की खेती होती है उनमें गुलाब, बेला, चमेली तो कहीं ग्लेडुलस, रजनीगंधा और जरबेरा का भी उत्पादन होता है। नेपाल में पर्व के दौरान सबसे अधिक मांग गेंदा की रहती है। अचानक हुए बदलाव से काफी नुकसान हुआ है।
रामदरस सैनी, नौतनवा, कारोबारी


एक्पर्ट कमेंट:-
भारत- नेपाल के रिश्तों में पुराने वक्त जितनी मुधरता नहीं दिख रही है। हमेशा नियमों में बदलाव से दोनों देशों की जनता परेशानी हो रही है। आपसी रिश्तों के साथ व्यापारिक रिश्ते भी प्रभावित हो रहे हैं। नेपाल में राजतंत्र के दौरान रिश्ते बेहद मजबूत हुआ करते थे। भारत की विदेश नीति को नेपाल के मामले में पूरी तरह से सफल नहीं माना जा सकता है। नेपाल में चीन की दखल भी बढ़ा है, इसका प्रभाव भी दिख रहा है। अगर ऐसे ही सब कुछ चलता रहा तो आने वाले दिनों में कुछ और बदलाव दिख सकता है।

प्रोफेसर इनामुल्लाह सिद्धिकी, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान, जवाहर लाल नेहरू पीजी कालेज


फल सब्जियों पर कड़ाई, लैब जांच किया अनिवार्य

-नेपाल सरकार ने फल और सब्जियों पर 13 प्रतिशत वैट कर भंसार कार्यालय में लेना शुरू कर दिया। जिससे नेपाल के कारोबारियों ने भारत से फल सब्जियों के आयात को सीमित कर दिया। इससे भारत के किसानों और व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। बीते माह केवल तक सोनौली सीमा से 40 से 50 गाड़ी फलों और सब्जियों का नेपाल को निर्यात होता था। लेकिन अभी यह 10 गाड़ी पर आ गई है। सोनौली आलू प्याज के व्यापारी सन्नी गुप्ता ने बताया कि नेपाल सरकार ने पहले अपने वार्षिक बजट में सब्जियों पर आयात पर 13 फीसदी वैट लगा दिया था। नेपाल में ज्यादातर सब्जियां भारत से ही जाती हैं। नेपाल सरकार के इस कदम से फल सब्जी के दाम बढ़ गए।



मुर्गे के आयात पर लगाई रोक

नेपाल राष्ट्र में दशहरे पर्व को लेकर लोग काफी उत्साहित होते हैं। नेपाली मूल के लोग विश्व में कहीं रहें दशहरे पर्व पर घर जरूर आते हैं। देवी देवताओं को पूर्वजों के अनुसार बकरे, भैंस और मुर्गे की बलि की प्रथा को पूरा करते हैं। नेपाल में करीब एक साल से पशु पक्षियों के आयात पर सरकार ने कुछ प्रमाणपत्र की अनिवार्यता का हवाला देकर रोक लगा दिया है। भैरहवा बिरयानी हाउस के कारोबारी शमशाद अहमद ने बताया कि काले मुर्गे की डिमांड दशहरे के पर्व पर ज्यादा है। अभी भैरहवा में चार हजार रुपये किलो नेपाली मुद्रा में इसकी बिक्री हो रही है।

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केले पर बढ़ाई निगरानी, डंडियों पर रोक लैब अनिवार्य

नेपाल में केले में पनामा बीमारी का पता चलने के बाद नेपाल सरकार ने केले के आयात में कड़ाई करते हुए अलर्ट जारी किया। पनामा नामक बीमारी के बाद नेपाल प्रशासन ने केले के पत्ते और डंडी पर रोक लगाते हुए चालक सहित पूरे ट्रक का सेनिटाइजर अनिवार्य कर दिया है। फल कारोबारी शहजाद खान निवासी सोनौली ने बताया कि पनामा नामक बीमारी के बाद केले का निर्यात प्रभावित हुआ है। पहले 10 से 15 गाड़ी प्रतिदिन जाती थी। लेकिन अब नहीं के बराबर हैं।

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100 रुपये से अधिक भारतीय मुद्रा के चलन पर पूर्ण रूप से रोक

नेपाल सरकार ने सौ रुपये भारतीय से अधिक का नोट नहीं रखने का सख्त निर्देश दिया है। इसके साथ ही नेपाल राष्ट्र बैंक ने सूचना सार्वजनिक की है। जिसमें भारतीय सौ रुपये से अधिक नोट के कारोबार, घरों और पास में नही रखने लेन-देन नहीं करने का आदेश दिया है। भारतीय सौ रुपये से अधिक के नोट से नेपाल में कारोबार नहीं करने का आदेश दिया है। व्यापार मंडल तहसील अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने बताया कि भारतीय पर्यटकों और नेपाल में कारोबार करने वाले व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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ब्रांडेड शराब के आयत पर रोक लगाई

नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष से ब्रांडेड शराब के आयात पर रोक लगाई है। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए शराब सहित विलासिता के दर्जनों सामानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिस कारण नेपाल के होटलों और रेस्टोरेंट में ब्रांडेड विदेशी शराबों की कमी हो गई है।

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भारतीय वाहनों पर लगाना तीन गुना शुल्क

पड़ोसी देश नेपाल में इन दिनों बदलाव की प्रक्रिया कुछ तेज हो गई है। दशकों से चल रहे नियम धीरे-धीरे बदलते दिख रहे हैं। हरिश्चंद्र निवासी सोनौली ने बताया कि भारत से नेपाल जाना अब और महंगा हो गया है। नेपाल सरकार ने दो व चार पहिया सहित पर्यटक भारतीय पर्यटक बसों के प्रवेश शुल्क में वृद्धि के बाद आरटीओ परमिट शुल्क में तीन गुना की बढोतरी की गई है। एक दिन के लिए नेपाल में प्रवेश करने पर दो पहिया वाहन का प्रवेश शुल्क पहले 150 रुपये (नेपाली) था। अब इसे 200 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही बाइक के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं होती थी। अब बाइक के लिए 200 परमिट लगाया गया है। चार पहिया वाहन ले जाने पर पहले 500 रुपये देने प़ड़ते थे। अब 600 रुपये (नेपाली) देना पड़ रहा है। परमिट के लिए 150 देने होते थे अब 500 रुपये लग रहा है। बस के लिए पहले 500 रुपए परमिट लगता था अब 700 रुपये लिया जा रहा है।

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भारतीय रुपये की लेन-देन बंद, बढ़ी मुश्किलें

नेपाल में जहां भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी के साथ व्यापारिक संबंध है। भारतीय 100 रुपये नेपाली मुद्रा में 160 रुपये होता है। पहले नेपाल के लगभग सभी स्थलों पर भारतीय रुपये आसानी से स्वीकार किए जाते थे। लेकिन अब नेपाल में भारतीय मुद्रा को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। कहने को तो नेपाल में 25 हजार भारतीय मुद्रा ले जा सकते हैं, लेकिन नेपाल के व्यापारी, दुकानदार, होटल और पर्यटन से जुड़े सभी को भारतीय मुद्रा लेने से साफ मना कर दे रहे हैं।



चावल निर्यात पर लगाई रोक

भारत सरकार ने चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके बाद चावल नेपाल निर्यात बंद गया है। इसके पहले सरकार ने चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। इसके बाद चावल की तस्करी शुरू हो गई और नेपाल में दाम दो गुना हो गया फिर भी भारत मे चावल के दाम कम नहीं हुए।
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प्याज पर लगाया 40 प्रतिशत शुल्क फिर हटाया गया

भारत सरकार ने प्याज निर्यात के लिए 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा लिया है इसके लिए निर्यात बीजक मूल्य निर्धारण करते हुए प्याज के निर्यात को मंजूरी दी । प्याज कारोबारी रमेश बनिया निवासी भैरहवा ने बताया कि भारत सरकार ने भले ही कस्टम शुल्क हटा लिया है। लेकिन बीजक मूल्य बढ़ने से महंगाई बढ़ गई है।
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