महराजगंज। बजट में बौद्ध स्थलों के विकास की बात कही गई है। ऐसे में जिले में देवदह व रामग्राम के विकास की आस जगी है। इनका विकास होने से पर्यटन को गति मिलेगी।
जिले में पर्यटन से जुड़े स्थलों की तस्वीर आने वाले दिनों में बदलने की उम्मीद है। बजट में बौद्ध स्थलों का जिक्र होने से क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि कुछ बेहतर होगा। सरकार की ओर से बौद्ध स्थलों के विकास की बात होने से तराई में पर्यटन के विकास को गति मिलेगी। बजट को लेकर पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कारोबारी राकेश कुमार गुप्ता कहते हैं कि कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। जिले में बौद्ध स्थलों का विकास हो तो बेहतर होगा।
उन्होंने बताया कि रामग्राम को पहचान मिली तो पर्यटक अधिक आएंगे, इससे जंगल सफारी में भी पर्यटकों की भीड़ होगी तो फायदा होने की संभावना है। सरकार ने हर क्षेत्र में बेहतर करने की कोशिश की है। शिक्षक सुधीर त्रिपाठी कहते हैं कि बौद्ध स्थलों के विकास की बात तो की जाती है, लेकिन कुछ खास नहीं हो सका है। बजट से उम्मीद है कि यहां भी कुछ बेहतर हो जाए।
नौतनवा क्षेत्र के बनरसिहा कला देवदह के प्राचीन बौद्ध स्तूप के निकट वर्तमान में एक विपश्यना हाल का निर्माण अंतिम चरण में है, जिसकी लागत करीब पौने तीन करोड़ है। जबकि देवदह के बौद्ध स्तूप अब भी पहले की तरह पड़े हैं। वहां पर कोई कार्य नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त विपश्यना हाल तक जाने के लिए इंटरलॉकिंग सड़क बन गई है, लेकिन प्राचीन विशाल जलाशय के सुंदरीकरण के लिए कोई कार्य नहीं हुआ है। आज भी देवदह बनरसिहा कला के स्तूप व जलाशय उपस्थित नजर आ रहे हैं।
दूसरी तरफ चौक जंगल में स्थित रामग्राम में जहां पर स्तूप है वहां पर जंगल में लगभग 10 एकड़ जमीन जंगल में एक स्क्वायर किया गया है। स्तूप के चारों तरफ बनाया जाएगा जहां पर तमाम पुष्कर्णी जलाशय है। जो स्तूप के आसपास तीन पुष्करणीय कर पुष्कर्णी है उसका विकास किया जाएगा और राम ग्राम जंगल में गेट पर जो पोखरा है जहां पर उसे पोखरे पर पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 7 करोड़ का काम विश्रामगृह का निर्माण हो रहा है।
वर्ष 2006 से महराजगंज के बौद्ध स्थलों के विकास की लगातार मांग कर रहे देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने का कहना है कि वर्तमान सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बौद्ध स्थलों का विकास पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक रामग्राम के स्तूप का उत्खनन शुरू नहीं कराया जा सका है। दूसरी तरफ देवदह के जर्जर स्तूप के संरक्षण के लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बजट से उम्मीद है कि इस क्षेत्र में कुछ बेहतर हो जाए।