सोनौली में पकड़े गए चीनी नागरिक के साथ पुलिस व एसएसबी जवान।
महराजगंज। सोनौली बॉर्डर पर गिरफ्तार चीन के दो नागरिकों और एक तिब्बती से पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जो चीनी नागरिक पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों के सामने खुद को गूंगा दिखा रहे थे, वह फर्राटे से चीन की भाषा बोलते हैं। खुफिया टीम की सख्ती के बाद दोनों का झूठ सामने आया। इतना ही नहीं उनका आधार कार्ड भी नेपाल में बना था। पूछताछ में पता चला कि गोरखपुर से ट्रेन पकड़कर दोनों दिल्ली के लिए निकलने की फिराक में थे।
आईबी, रा सहित अन्य एजेंसियों की पूछताछ में दिल्ली के कृष्णानगर निवासी तिब्बती शरणार्थी लबसंग ने बताया कि उसके साथ आए हुए दोनों युवक चीन के नागरिक हैं। दोनो गूंगे हैं। कुछ बोल नहीं पाएंगे। टीम ने जब कड़ाई से पूछताछ की तो दोनों का नाटक खुल गया और चीन की भाषा में बोलने लगे। एक ने अपना नाम यांग मेंग मेंग और दूसरे ने गु बॉकिअंग निवासी अनहुई चाइना बताया। उनके पास से मिले आधार कार्ड में वगये दोरजी निवासी त्रिनले नुदेन देगे डिवीजन हिमाचल प्रदेश और दूसरे के आधार पर लोबसांग जमयांग निवासी मोशे गया कैंप, कर्नाटक का पता लिखा मिला।
दोनों के मोबाइल फोन की जांच में चीन का पासपोर्ट और भारतीय दूतावास का परिचय पत्र मिला। इनके पास भारत में प्रवेश के लिए वीजा नहीं था। पूछताछ में पता चला कि दोनों का आधार कार्ड तिब्बती साथी लबसंग सेरिग ने काठमांडो में बनवाया। इतना ही नहीं उसने 40 हजार रुपये में दाेनों को भारत में प्रवेश कराने की जिम्मेदारी भी ली थी। लबसंग ने बताया कि दोनों चीनी नागरिकों को लेकर कार से काठमांडो से सोनौली सीमा से सटे बेलहिया पहुंचा। यहां से पैदल सीमा पार कराने के बाद गोरखपुर रेलवे स्टेशन छोड़ना था। वहां से ट्रेन से दिल्ली भेजने की तैयारी थी।