महराजगंज। सावधान...अगर आप भी कम गहराई वाले हैंडपंप का पानी पी रहे हैं तो सतर्क हो जाएं नहीं तो बीमार हो सकते हैं। हालांकि जल निगम पानी की जांच में सब कुछ ठीक बता रहा है, लेकिन पानी का पीएच 7.99 तक पहुंच गया है। इसका अधिकतम स्तर 8.5 है। यानी जिले में पानी की पीएच खराब होने की ओर है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। पीएच यानी पानी अम्लीय है, खारापन है। पानी में कैल्सियम कम है। इसका स्तर पानी में 75 से 100 के बीच होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में पानी में कैल्सियम 54 एमजी प्रति लीटर है। हैंडपंप की गहराई कम से कम 120 फीट होनी चाहिए।
जल निगम की जिला स्तरीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 881 गांवों में पानी की जांच हुई। इससे पानी की शुद्धता खराब होने की स्थिति नहीं है, लेकिन पीएच यानी खारापन का स्तर बढ़ रहा है। अभी खतरे के स्तर से नीचे है। 8.5 पीएच से ज्यादा खराब स्तर माना जाता है। वर्तमान में 7.99 पीएच दर्ज किया गया है। पानी का टीडीएस 287, कठोरता 198, कैल्सियम 54 है। मैग्निशियम भी 26 एमजी प्रति लिटर है। जबकि इसे 30 से 100 के बीच होनी चाहिए। सल्फेट 56 एमजी प्रति लीटर है, इसे 200 से 400 के बीच होना चाहिए। आयरन .052 एमजी प्रति लीटर है, जबकि इसे एक एमजी प्रति लीटर होना चाहिए। फ्लोराइड 0.24 एमजी प्रति लीटर है, जबकि इसे 1 से 1.50 बीच होना चाहिए।
पनियरा के दर्जनों गांवों के हैंडपंप से शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के मुजुरी, रामनगर, सतगुर, सुचितपुर, लाला बड़हरा, अनंतपुर, मौलागंज, गिरगिटिया, रुद्रापुर, खजुरिया आदि गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंप ठीक नहीं है। चंद्रशेखर ने बताया कि सतगुर बाजार के अंबेडकर पार्क परिसर में इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है। वहां गंदगी है। रिबोर की जरूरत है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनियरा में तैनात चिकित्सक डॉ. सतेंद्र कुमार ने बताया कि गंदा पानी पीने से लोग पेट की बीमारी और पीलिया की चपेट में आ सकते हैं।
सदर ब्लाॅक क्षेत्र के गांवों में हैंडपंप खराब पड़े हैं। बागापार, केवलापुर खुर्द, सिसवनिया, सोनरा, विजयपुर, अरनहवा, बैजनाथपुर, बेलवाकाजी, लखिमा थरुआ, बड़हरा रानी, सरडीहा, कसमरिया, बरवाराजा, चैनपुर, कम्हरिया, अहमदपुर, पकड़ी आदि गांव में हैंडपंप खराब पड़े हैं जो ठीक हैं वह भी दूषित पानी उगल रहे हैं। जिम्मेदारों द्वारा मरम्मत व रख-रखाव का कोई उपाय नहीं किए जाने से ग्रामीण नाराज हैं।
पानी अभी शुद्ध है, घबराने की जरूरत नहीं
जल निगम के लैब टेक्नीशियन राधेश्याम ने बताया कि जिले में पानी की शुद्धता बनी है। अभी घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग की ओर से हमेशा जागरूक किया जाता है। कम गहराई वाले हैंडपंप का पानी नहीं पीना चाहिए। कम से कम 120 फीट गहरे हैंडपंप का पानी पीए तो बेहतर रहेगा।
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जिले में समय-समय पर पानी की जांच कराई जाती है। प्री मानसून व पोस्ट मानसून में विशेष रूप से जांच की जाती है। फिल्ड टेस्ट कीट के माध्यम से भी पानी की जांच होती है। शुद्ध जल के सेवन को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है।
-आतिफ हुसैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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शुद्धजल को लेकर समस्या बनी रहती है। क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप का पानी ठीक नहीं लगता है। समस्या के प्रति जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। खराब हैंडपंप को रिबोर करने की जरूरत है।
-अटल कुमार, नौतनवा
ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की समस्या रहती है। ज्यादातर हैंडपंप कम गहराई वाले होते हैं। इसका पानी पीने से समस्या होती है। शुद्ध जल की समस्या है, लेकिन क्या किया जाय।
-प्रेमचंद, बागापार
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कई बीमारियों का कारण है दूषित पानी
जिला अस्पताल के डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि दूषित पानी कई बीमारियों का कारण है। इससे सबसे ज्यादा पेट संबंधित बीमारियां होती हैं। पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से डायरिया होने का खतरा रहता है। डायरिया से पीड़ित मरीजों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। दूषित पानी पीने से पेट में इंफेक्शन, उल्टी, दस्त की समस्या होती है। पेयजल में मानक से बहुत ज्यादा बैक्टीरिया शरीर के लिए हानिकारक है।