महराजगंज। जनपद में उद्यमियों के लोन से संबंधित फाइलों को स्वीकृत करने में बैंक शिथिलता बरत रहे हैं। उद्योग स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा के रूप में बैंक ही आ गए हैं। महीनों से उद्यमियों के आवेदन फाइलें बैंकों में पड़ी हैं। बावजूद इसके लोन स्वीकृत नहीं हो रहे हैं। ऐसे में उद्योग लगाने में परेशानी हो रही है। जहां बैंक कर्ज देने में आनाकानी की स्थिति में हो। वहां उद्योग कैसे लगाया जा सकता है। वित्तवर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के तहत उद्योग विभाग की तरफ से विभिन्न बैंकों को ऋण स्वीकृति के लिए 150 फाइलें भेजी गईं। इनमें बैंकों ने अब तक मात्र एक करोड़ 73 लाख रुपये ऋण की 69 फाइलें ही स्वीकृत की हैं। इसमें 54 उद्यमियों को 89 लाख रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं।
उद्यमियों की ऋण फाइलें समय से निस्तारित करने के शासन के निर्देश का बैंकों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। निर्देश के मुताबिक 15 दिनों में उद्यमियों के ऋण फाइलों को निस्तारित कर देना है। यहां पर स्थिति ही उलट है। बैंकों में महीनों से फाइल पड़ी हैं और उद्यमी परेशान हो रहे हैं। उद्यमियों को ऋण वितरण के मामले में सबसे ढीला रवैया भारतीय स्टेट बैंक का है। जिला उद्योग विभाग ने मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के तहत 29 इकाइयों के 81.05 लाख रुपये वित्त पोषण के लिए भारतीय स्टेट बैंक को भेजा है। अब तक मात्र सात इकाइयों के 15.3 लाख रुपये के ऋण मंजूर हुए हैं। बाकी उद्यमी ऋण के लिए परेशान हो रहे हैं।
जिला उद्योग विभाग के मुताबिक एक जनपद एक उत्पाद के तहत जनपद में 24 इकाई लगाने के लक्ष्य हैं। विभाग ने औद्योगिक इकाई लगाने के लिए उद्यमियों के 38 लाख 50 हजार रुपये ऋण के लिए 15 फाइलें बैंकों को भेजी थी। उसमें से बैंकों ने अब तक केवल 29 लाख 50 हजार रुपये के नौ फाइलों को ही मंजूर किया। इनमें से एसबीआई को 3 लाख 9 हजार की तीन फाइलें उद्योग विभाग ने भेजी, लेकिन अभी तक एक भी फाइल मंजूर नहीं हुई। इससे उद्यमी निराश हो रहे हैं।
बैंकों में समय से लोन पास न होने के कारण औद्यगिक इकाइयों को स्थापित करने में विलंब होता है और उद्यमियों को भी निराशा होती है। जबकि शासन का निर्देश है कि निश्चित समय में ऋण फाइलों को स्वीकृत कर उद्यमियों को ऋण दिए जाएं।
-अभिषेक प्रियदर्शी, उपायुक्त, उद्योग विभाग