-बुखार और खांसी के मरीजों की संख्या अधिक, एक सप्ताह तक दवा खाने पर लोगों को मिल रहा लाभ
- राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बसडिला में हर दिन ओपीडी में 40 से अधिक आ रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शरीर में होने वाले नुकसान को देखते हुए मरीज आयुर्वेदिक दवाओं का रुख करने लगे हैं। यही कारण है कि राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बसडिला में प्रतिदिन 40 से अधिक बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। दवा खाकर उन्हें एक सप्ताह या उससे भी कम समय में लाभ मिल रहा है।
वायरल बुखार के साथ मलेरिया के मरीज भी आ रहे हैं। जनवरी से अब तक डेंगू के 21 मरीज सरकारी आंकड़ों में दर्ज हैं। लगातार बढ़ते मरीजों के चलते जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी सीएचसी में काफी भीड़ उमड़ने से दवा मिलना मुश्किल हो रहा। वहीं अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि लोग आयुर्वेदिक दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बसड़िला में दो माह से प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें 40 से अधिक मरीज बुखार, खांसी, जुकाम से पीड़ित पहुंच रहे हैं। कई मरीज लंबे समय से एलोपैथिक दवा खाने के बाद सही न होने पर आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्हें गिलोय, रासनापत्र चूर्ण, संजीवनी बटी आदि से राहत मिली है।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बसड़िला डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। बुखार की वजह से मरीज काफी परेशान हैं। आयुर्वेदिक से उन्हें आराम मिल रहा है।
काढ़ा या जूस बनाकर पीने से बढ़ेगी प्लेटलेट्स
डेंगू की चपेट में आने के बाद तेजी के साथ प्लेटलेट्स गिरती है। इन्हें बढ़ाने में देसी नुस्खे भी काम आते हैं। डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि अनार का जूस और पपीते के पत्ते, गिलोय, थोड़ी अदरक और तुलसी के आठ से नौ पत्ते डालकर काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती है।
गिलोय का सेवन अधिक करने से होता नुकसानबुखार आने पर लोग गिलोय में काली मिर्च डालकर पीने लगते हैं। बिना चिकित्सक की सलाह से अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर को कई नुकसान भी हो सकते हैं। शरीर में गर्मी भी पैदा हो सकती है।
-डॉ. आशीष त्रिपाठी