महराजगंज। जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी आ रही है। विभाग के अधिकारी इसका प्रमुख कारण लोगों को जागरूक होना और समय पर इलाज कराना मान रहे हैं। कुष्ठ रोग विभाग की टीम समय पर क्षेत्र में भ्रमण कर रोगियों को चिह्नित कर इलाज करती है।
जानकारी के मुताबिक, जिले वर्ष 2023 में कुष्ठ रोग 170 मरीज थे, जबकि 2024 में कुल 129 मरीज हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो इस कमी का मुख्य कारण जन जागरूकता अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन और समाज में बढ़ती स्वास्थ्य शिक्षा है। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. नवनाथ प्रसाद ने बताया कि कुष्ठ रोग लेप्रोसी बीमारी है। एक पुरानी और संक्रामक बीमारी है जो त्वचा, तंत्रिका तंत्र और अंगों को प्रभावित करती है।
इसकी पहचान और उपचार में जनजागरूकता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आने वाले समय में भी इसी तरह के जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ाते हुए कुष्ठ रोगियों की समस्या को और अधिक प्रभावी ढंग से पहल करने की दिशा में जन जागरूकता और उचित चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। जिले में दो सितंबर से लेकर 15 सितंबर तक घर-घर कुष्ठ रोगियों की खोजी अभियान चलेगा। कुल 2747 टीमें लगी हैं, जबकि इसकी निगरानी के लिए 559 सुपरवाइजरों की तैनाती हुई है।
क्या है कुष्ठ रोग
कुष्ठ एक संक्रामक रोग है जो विशेषकर हाथ-पैर या त्वचा पर गंभीर विकृत घाव का कारण बनता है। कुछ लोगों में ये तंत्रिकाओं की क्षति का कारण भी बनता है। कुष्ठ रोग सदियों से चली आ रही बीमारी है, लेकिन यह बहुत संक्रामक नहीं होती है। कुष्ठ रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति की नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के निकट और बार-बार संपर्क में आने के कारण ही इसका संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
कुष्ठ का उपचार
कुष्ठ रोग का उपचार संभव है। ये इसके प्रकार पर निर्भर करता है। संक्रमण को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। छह माह से एक वर्ष तक इलाज चल सकता है। अगर कुष्ठ रोगियों के तंत्रिकाओं में क्षति की समस्या है, तो इसके लिए अन्य उपचार को प्रयोग में लाया जाता है।