महराजगंज। मच्छरों से बचाव के लिए घर में जलने वाली अगरबत्ती सेहत पर विपरीत असर डाल रही है। केएमसी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 30 मरीज खांसी की समस्या से पीड़ित आ रहे हैं। आंखों में जलन के साथ खांसी भी हो रही है। अक्सर लोग बंद कमरे में मॉस्किटो क्वॉइल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोगों को खांसी की समस्या पीड़ित हो रहे हैं। कई लोगों को इस धुएं से घबराहट जैसी समस्या भी परेशान हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शिप्रा के अनुसार ओपीडी में आने वाले मरीजों से पूछताछ में पता चला की घर में मच्छररोधी अगरबत्ती जलाते हैं। इससे उनकी आंखों में जलन की समस्या है। सात से आठ मरीज समस्या से पीड़ित मिले। इनको जरूरी दवा के साथ सुझाव दिया गया। फिजिशियन डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि अगर किसी को सांस संबंधी बीमारी है तो उनके लिए मॉस्किटो कॉइल बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है। दरअसल, मच्छर भगाने वाली कॉइल के धुएं में एलेथ्रिन और पाइरेथ्रिन जैसे केमिकल्स होते हैं। इस धुएं के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन पैदा हो सकती है। अगर कोई लंबे समय तक इन केमिकल्स के संपर्क में रहे तो उसे खांसी, गले में घरघराहट और सांस से जुड़ी अन्य परेशानियां हो सकती हैं।
होम्योपैथ चिकित्सक देव कुशवाहा कहते हैं कि घर के छोटे बच्चे, विशेषकर जो घुटने पर चलते हैं वे इसे खेलने की चीज समझकर मुंह में डाल लेते हैं। यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। मॉस्किटो कॉइल में इंसेक्टिसाइड का प्रयोग किया जाता है, जो पेट में चला जाए तो पेट दर्द, उल्टी और पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके अलावा, मॉस्किटो कॉइल की वजह से आसपास की हवा भी दूषित होती है, जो अलग तरह से व्यक्ति को बीमार कर सकती है।