सिसवां पीएचसी पर आयोजित आरोग्य मेले में मरीज की जांच करते फार्मासिस्ट बैजनाथ गुप्ता।
सिसवा बाजार। मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में महज खानापूर्ति की जा रही है। केंद्रों पर डॉक्टर नहीं रहते हैं तो फार्मासिस्ट मरीजों को दवा दे देते हैं। अब तो मरीज भी आरोग्य मेला में इलाज कराने से परहेज करने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ बेहतर है। दवाएं पर्याप्त हैं, डॉक्टर भी इलाज करते हैं। पड़ताल में जिम्मेदारों की कथनी और करनी में अंतर मिला और अधिकारियों के दावों की पोल खुल गई।
सिसवा कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 11:45 बजे फार्मासिस्ट बैजनाथ गुप्ता और एक स्वीपर राजेश के भरोसे अस्पताल चल रहे थे। यहां बैनर पोस्टर नहीं लगा था। फार्मासिस्ट गौरी बडैपुरवा निवासी शशिकला का इलाज कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डॉक्टर पीजी की परीक्षा देने चले गए हैं। अब तक दस मरीजों का इलाज किया जा चुका है।
12:30 बजे बंदी न्यू पीएचसी पर बाहर मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का बैनर लगा था। फार्मासिस्ट रामेश यादव पिपरियां निवासी हकीकून का रक्तचाप देख रहे थे। उन्होंने बताया कि 6 मरीज आये थे। अस्पताल पर तैनात डॉ. बालकेश्वर का आंख का ऑपरेशन हुआ है, वह ड्यूटी पर नहीं आये हैं। एएनएम गीता कुशवाहा मौजूद थीं।
1:34 बजे यही हाल रुद्रापुर न्यू पीएचसी का था। यहां भी फार्मासिस्ट अशफाक अहमद वार्ड ब्यॉय राजेश कुमार और स्टाफ नर्स बिंदु द्वारा अस्पताल संचालित होते मिला। बाहर मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का बोर्ड लगा हुआ था। सुबह से 17 मरीज आ चुके थे, यहां सभी दवाएं उपलब्ध हैं। सिसवा सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. ईश्वरचंद विद्यासागर का कहना है कि आरोग्य मेले में अगर कहीं कमी है, उसे ठीक किया जाएगा।