महराजगंज। जिला मुख्यालय पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है। बस पहुंचते ही ई-रिक्शा चालक घेर लेते हैं। यात्री बस से उतर भी नहीं पाते हैं। उन्हें परेशानी होती है। सवारी बिठाने के लिए कई बार चालक आपस में ही भीड़ जाते हैं।
जिला अस्पताल गेट के सामने इनका दखल इस कदर रहता है कि पूरे दिन इनका जमावड़ा लगा रहता है। इसी तरह की समस्या रोडवेज बस अड्डे के आसपास देखी जाती है। कोई बस जैसे ही डिपो अथवा सड़क पर खड़ी होती है यह लोग सवारियों के बस से उतरने से पहले ही वाहन रोककर रास्ता अवरूद्ध कर देते हैं। पिछले दिनों एआरटीओ ने शिकायत पर बस स्टेशन परिसर के आसपास कुछ का चालान भी किया था, बावजूद इसके मनमानी पर कोई अंकुश नहीं है।
आधुनिक दौर में ई-रिक्शा से यातायात में सुविधा जरूर दी है, लेकिन महराजगंज जिले में मुख्यालय के लोग ही इनसे परेशान हैं। स्थिति यह है कि हर रोड पर इनका बोलबाला तो है ही लेकिन यह मनमाना किराया लोगों से वसूलते हैं। दिन डूबने के बाद अगर कस्बे में चलना है तो वाहन की लाइट बुझाकर नगर निगम के लैंप पोस्ट के सहारे चलते हैं। अमित तिवारी, आशीष जायसवाल जिला अस्पताल के सामने तो 10 बजे के बाद शाम तक ऐसी स्थिति रहती है कि गेट के रास्ते एंबुलेंस को भी दाखिल होने में दिक्कत आती है।
कोई मरीज निजी या किराए के वाहन से अस्पताल आए वह भी असुविधा झेलता है। गांधी नगर वार्ड के रामतवल अपनी पत्नी सुजाता के साथ गठिया रोग के इलाज के लिए आए थे, लेकिन ई-रिक्शा चालकों की भीड़ के कारण 20 मिनट बाद अस्पताल परिसर में दाखिल हुए। कहा कि अंदर जाने के लिए वाहन चालक रास्ता ही नहीं दे रहे थे। वह ऐसे इकलौते व्यक्ति नहीं हैं अस्पताल आने वाले लगभग सभी इस समस्या से जूझते हैं। इसी प्रकार रोडवेज में बस रुकते ही ई-रिक्शा चालक बस को घेर लेते हैं और तबतक डटे रहते हैं जब तक सवारी न मिले।