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Maharajganj News: ट्रैक्टर की चपेट में आने से किसान की मौत

Sun, 02 Apr 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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मृतक जयप्रकाश का फाइल फोटो
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जलौनी लकड़ी लदवा कर घर लौटते समय हुआ हादसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। मधुकरपुर महदेवा गांव के पास ट्रैक्टर की चपेट में आने से किसान की मौत हो गई। सूचना मिलते ही घर में सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के मनिकौरा गांव के रहने वाले जयप्रकाश (57) शनिवार को दिन में चंदनपुर नर्सरी के किनारे जलौनी लकड़ी लेने गए थे। करीब पांच बजे ट्रैक्टर पर बैठ कर घर लौट रहे थे। वह पुरंदरपुर रेलवे अंडरपास के बाहर मधुकरपुर महदेवा गांव के पास पहुंचे कि अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर से नीचे गिर गए। उसी दौरान ट्रॉली का पहिया उनके ऊपर चढ़ गया। इससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
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परिजन मौके पर पहुंच कर शव को घर लाए और सूचना पुलिस को दी। मृतक का नेवासा फरेंदा थाना क्षेत्र के भगवतनगर परसिया के कुड़ियहवां में है। यहां पर परिवार के साथ रहते थे। प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र कुमार राय ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

बेटे की शादी भी नहीं देख पाए जयप्रकाश
फरेंदा। मनिकौरा निवासी जयप्रकाश का नेवासा भगवतनगर परसिया के कुड़ियहवां में है। जहां पर परिवार के साथ रहते थे। उनके दो बेटे जितेंद्र, शिवेंद्र व बेटी रीता व ममता है। बड़े बेटे की शादी 31 मई को तय है। इसकी तैयारी के लिए पूरा परिवार लगा हुआ था। लकड़ी लदवा कर लौटते हुए हादसे के शिकार हो गए। उनके मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी भी मृतक के कंधे पर थी। उनकी मौत से पत्नी परमपत्ती देवी व बेटियां दहाड़े मार कर रो-रो कर विधाता को कोस रही थीं।
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पति के शव से लिपटकर बेसुध हो रही थी पत्नी
फरेंदा। ट्रैक्टर की चपेट में आने से पति की मौत की सूचना पत्नी को हुई तो बेसुध हो गई। पति के शव से लिपट कर पत्नी परमपत्ती देवी रो-रोकर बेहोश हो रही थी। उनके साथ दोनों बेटियां व दोनों बेटों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। उनको मौजूद लोग ढांढस बंधा रहे थे। दोनों बेटे व बेटियां रोते हुए पिता का सहारा छिन जाने की बात कहते हुए बेसुध हो रहीं थीं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बबलू गुप्ता के साथ गांव के तमाम लोग इकट्ठा होकर परिजनों को समझा कर शांत कराने में जुटे रहे। संवाद
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