महराजगंज। आंबेडकर जनमोर्चा संगठन बनाकर महिलाओं को कर्जमाफी का झूठा आश्वासन देकर ठगी करते थे। आंबेडकर जनमोर्चा संगठन होने की वजह से गांव की गरीब और असहाय महिलाएं आसानी से झांसे में आ जाती थीं। फिर आरोपी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से लिए गए कर्ज को न जमा करने के नाम पर भड़का कर उनसे रकम की वसूली करते थे।
आरोपी महिलाओं के अंगूठे की मदद से कई तरह के फर्जी दस्तावेज भी तैयार करते थे। संगठन का नाम भी ऐसा रखे थे जिससे एक वर्ग विशेष प्रभावित होता था।
जेल जा चुका श्रवण लोगों से कहता था, लोन न चुकाओ, मुख्यमंत्री के यहां जनता दर्शन में जाओ। महिलाओं को लोन न चुकाने और फाइनेंस कंपनियों से मुकाबला करने के लिए भड़काया था। अम्बेडकर जन मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा गौतम का पता नहीं है। पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी है।
आरोपी से पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उससे पता चला की महिलाओं को लोन न चुकाने के लिए उकसाया जाता था। इसके लिए गांवों में बैठकें की जाती थीं। संगठन से जुडे़ अन्य सदस्य भी सहयोग करते थे। यह सब इतनी सफाई से की जाती थी की महिलाएं इनकी बातों पर आसानी से भरोसा कर लेती थीं। यही वजह से इनके कहने पर अधिक संख्या में महिलाएं गोरखपुर पहुंच गईं थीं। महिलाओं को गुमराह रकम ऐठने के चक्कर में संगठन का पूरा इस्तेमाल ठीक ढंग से किया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण में अहम जानकारी मिल सकती है।
मूलधन में पांच से छह हजार पहले ही काट लेते हैं
महराजगंज। जिले में विभिन्न नामों से दर्जन भर से ज्यादा कंपनियां कस्बों में कार्यालय खोलकर अपने एजेंट के जरिये मजदूर वर्ग का समूह बनाकर उन्हें कर्ज देते हैं। इलाज, जरूरत का सामन खरीदने, शादी-ब्याह या अन्य आवश्यकता होने पर कमजोर तबका यह सोचकर उनसे कर्ज ले लेता है कि धीरे-धीरे कमाई कर किस्त भर देगा। मगर, भारी भरकम ब्याज के कारण वह निरंतर समय से किस्त नहीं अदा कर पाता है। जानकार लोगों का कहना है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद रकम का एक हिस्सा प्रोसेसिंग चार्ज व बीमा के नाम पर काट लिया जाता है। यानी अगर किसी का 30 हजार रुपये ऋण स्वीकृत हुआ तो उसके हाथ में बमुश्किल 24-25 हजार रुपये ही आते हैं।