महराजगंज। कुट्टू के आटे में मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे में खरीदते समय सचेत रहने की जरूरत है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से चार दिन में चार नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। नियम के अनुसार 14 दिन में जांच रिपोर्ट आनी चाहिए, लेकिन नमूना बढ़ने पर अक्सर एक से दो माह लग जाता है।
व्यापारियों के अनुसार, नवरात्र में करीब पांच टन आटे की खपत होती है। धंधेबाजों ने व्रत में फलाहार कुट्टू के आटे में भी मिलावट कर दी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खुले में कुट्टू के आटे की बिक्री पर रोक लगाई तो धंधेबाजों ने इसे खपाने की व्यवस्था बना ली। सूत्रों की माने तो उसे पैकेट बनाकर बाजार में उतार दिया गया है।
थोक में यह आटा 140 से 145 रुपये प्रतिकिलो के भाव से बिक रहा है। वहीं, फुटकर में इसकी कीमत 260 रुपये प्रति किलो तक है। दुकानदारों ने इसे 250 ग्राम और 500 ग्राम के पैकेट में पैक कर दिया है। कुट्टू का अशुद्ध आटा लीवर के लिए हानिकारक होता है। अगर कुट्टू का आटा खरीद रहे हैं तो ब्रांडेड ही खरीदें और उस पर पंजीकरण नंबर व एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें। कुट्टू का खुला आटा बीमार बना सकता है।
शहर में काॅलेज रोड स्थित किराना व्यापारी रामचंद्र बताते हैं कि कुट्टू का आटा नवरात्र में ज्यादा बिकता है। प्रयास यही रहता है कि शुद्ध आटा ग्राहकों को दिया जाए। खपत के अनुसार ही कुट्टू का आटा मंगाया जाता है।
एक्सपायरी डेट देखकर ही खरीदें
प्रदेशभर में विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों से संग्रहित किए गए खुले कुट्टू के आटे के नमूने जांच में मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए हैं। खुले आटे से निर्मित खाद्य पदार्थों से कई जगह फूड पॉइजनिंग की घटनाएं हो चुकी हैं। इसको देखकर खाद्य एवं औषधि विभाग ने इसपर प्रतिबंध लगाया है। खाद्य औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से अनुरोध भी किया गया है कि ग्राहक पैक्ड कुट्टू के आटे के पैकेट पर निर्माता का पूरा पता, एफएसएसएआई लाइसेंस, पंजीकरण संख्या, पैकिंग डेट और एक्सपायरी डेट देखकर ही खरीदें। अगर कहीं बिना पूरी जानकारी लिखे पैकेट बिक रहे हैं तो इसकी सूचना भी दे सकते हैं।
रसायनिक पदार्थ एफ्लाटॉक्सिन लीवर को करता है संक्रमित
महराजगंज। जिले में कुट्टू के आटे में मिलावट की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन नमूना जांच के लिए भेजा गया है। जानकारों के अनुसार, कुट्टू के खुले आटे में मिला रसायनिक पदार्थ एफ्लाटॉक्सिन लीवर को संक्रमित करता है और यह कैंसर का कारक भी है। आमतौर पर यह सड़ी मूंगफली में पाया जाता है। इसका स्वाद कसैला होता है। कुट्टू के आटे में मिलने का मतलब है कि खराब मूंगफली को पीसकर इसमें मिलाया गया होगा। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एएम भाष्कर ने बताया कि मूंगफली खाने के दौरान अचानक ही किसी दाने में पूरे मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। वह इसी एफ्लाटॉक्सिन की वजह से होता है। यह लीवर टॉक्सिस होता है। कुटू के आटे में यह नहीं पाया जाता है। अगर सैंपल में इसकी पुष्टि हुई है तो हो सकता है कि उस आटे में सड़ी हुई मूंगफली को पीसकर मिलाया गया होगा। ऐसा आटा सेहत के लिए खतरनाक है। इसके उपयोग से लीवर संबंधी बीमारी हो सकती है। संवाद